गर्मी का हाल यह है कि एसी से भी गर्म हवा निकल रही है। ऐसी स्थिति में यदि बिजली की कटौती हो जाए, तो लोगों को बहुत अधिक परेशानी हो जाती है। राज्य के लगभग हर जिले में अघोषित बिजली कटौती से लोग काफी परेशान हो गए हैं। रात में तो सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। रातों में बिजली कटौती की वजह से लोग सो नहीं पा रहे हैं जिससे दिन में उनके काम बाधित हो रहे हैं।
बिजली कटौती का कारण पहला तो यह है कि राज्य में जितनी बिजली की मांग है, उपलब्धता उससे कम है। भीषण गर्मी की वजह से लगातार चल रहे ट्रांसफार्मरों को भी राहत देने के लिए विभिन्न इलाकों में बिजली कटौती करनी पड़ती है। यदि थोड़े-थोड़े अंतराल पर बिजली कट न लगाए जाएं, तो ट्रांसफार्मर और बिजली के तारों के फुंक जाने का खतरा हो जाता है। ट्रांसफार्मर को ठंडा रखने के अन्य उपाय भी करने पड़ते हैं।
प्रदेश में बढ़ती गर्मी की वजह बिजली व्यवस्था पर भारी दबाव है। तापमान में लगातार बढ़ोतरी के साथ ही घरेलू, कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। दोनों बिजली वितरण निगमों में बिजली की आपूर्ति और खपत में भारी बढ़ोतरी हुई है। छह दिनों में बिजली खपत 30 लाख यूनिट से पार पहुंच चुकी है। इन दोनों सब डिविजनों में सबसे ज्यादा बिजली के अघोषित कट लग रहे हैं, जिससे लोगों की परेशानियां भी बढ़ गई है। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) के 11 सर्कलों में पिछले बुधवार को बिजली की सप्लाई बढ़कर 1493.34 लाख यूनिट तक पहुंच गई थी।
जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, वैसे-वैसे एयर कंडीशनर और कूलर के उपयोग में तेजी आने से लोड लगातार बढ़ता जा रहा है। हरियाणा में गर्मी और धान के सीजन के दौरान बिजली की चरम मांग लगभग 11,000 मेगावाट से लेकर 13,231 मेगावाट (वर्तमान में) तक पहुंच जाती है। राज्य की कुल स्थापित उत्पादन क्षमता लगभग 11,000 से 12,000 मेगावाट के आसपास है, और इस मांग को पूरा करने के लिए पावर एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीदी जाती है।
राज्य में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत लगभग 1,805 यूनिट है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। यही वजह है कि बिजली विभाग को बार-बार कट लगाने पड़ते हैं। इससे जहां लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है, वहीं उद्योगों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ता है।
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