अशोक मिश्रसोमवार को ईंधन की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी की गई। इससे पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई। दो सप्ताह से भी कम समय में यह चौथी बढ़ोतरी है। दिल्ली में अब पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये और डीजल की कीमत 95.20 रुपये हो गई है। डीजल, पेट्रोल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों से लोग परेशान हो गए हैं।
महंगाई दिनोंदिन बढ़ रही है। डीजल पेट्रोल की कीमतों में इजाफा होने से परिवहन महंगा हो गया है। थोड़ी दूरी के लिए जहां लोगों को दस रुपये खर्च करना पड़ता था, उतनी ही दूरी के लिए अब पंद्रह रुपये देने पड़ रहे हैं। महंगाई का सबसे ज्यादा असर गरीबों की जेब पर पड़ा है। उनकी कमाई तो बढ़ी नहीं, लेकिन सब्जी, दाल, आटा, चावल से लेकर मसाले तक महंगे हो गए हैं।
दूध के दाम पहले से ही आसमान छू रहे हैं, उस पर मिलावटी दूध, दही और छाछ बेचे जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण ईंधन के दाम बढ़े हैं। इसके प्रभाव से हरियाणा में भी ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है जिससे रोजमर्रा की चीजों, सब्जियों और अनाज की ढुलाई लागत बढ़ने से खाद्य मुद्रास्फीति का खतरा पैदा हो गया है। ऐसी स्थिति में सब्जियों से लेकर राशन, फल और मसाले आदि महंगे हो गए हैं। रसोई गैस में पहले से ही आग लगी हुई है।
घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत एक हजार रुपये पार हो चुकी है। कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत भी लगभग तीन हजार रुपये प्रति सिलेंडर के आस पास पहुंच गई है। इसलिए होटल, रेस्त्रां और ढाबों में खाना काफी महंगा हो गया है। राज्य की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। डीजल महंगा होने से खेतों की जुताई, सिंचाई (डीजल पंप) और फसलों को मंडियों तक ले जाने का खर्च काफी बढ़ गया है। खेतों की सिंचाई के लिए अब किसानों को अपनी जेब से काफी पैसा खर्च करना पड़ रहा है। इन दिनों मंडियों में विभिन्न अनाज की खरीद हो रही है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढ़ने से किसानों को अपने घर से मंडी तक अनाज ले जाने के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
ऐसी स्थिति में अनाजों का समर्थन मूल्य तो नहीं बढ़ा, लेकिन अनाज की लागत बढ़ गई। ऐसे में किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले दस दिनों में चौथी बार डीजल पेट्रोल की बढ़ती कीमतों की वजह से किसानों में ही नहीं, आम जनता में भी काफी रोष पनप रहा है। लोगों का कहना है कि उनकी आय में बढ़ोतरी नहीं हो रही है, लेकिन लगातार महंगाई से घरेलू बजट बुरी तरह बिगड़ गया है। हरियाणा के उद्योगपतियों में भी महंगाई को लेकर काफी रोष है। उनका बजट बिगड़ने लगा है। कच्चे माल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसी स्थिति में उत्पादन लागत को काबू में रखना उनके लिए बहुत भारी पड़ रहा है।

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