Tuesday, May 26, 2026

धन संपत्ति का लालच परिवार के सदस्यों की जान का बना दुश्मन

अशोक मिश्र

हरियाणा में रहने वाले लोगों के पारिवारिक प्रेम और भाईचारे की मिसाल सदियों से दी जाती रही है। कुटुंब और गांव समाज के लोग एक दूसरे से मिलजुल कर रहते थे। गांवों में भाईचारा कायम रहता था। परिवार भी बड़े होते थे। संयुक्त परिवार होने की वजह से लोगों का आपस में प्रेम बना रहता था। दादी, दादा, ताया-ताई, चाचा-चाची, बुआ फूफा और चचेरे भाइयों में बहुत प्रेम हुआ करता था। 

मजाल है कि कोई बाहरी आदमी परिवार के किसी सदस्य को आंख दिखाकर सकुशल चला जाए। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। जब से एकल परिवार की अवधारणा ने हरियाणा में पैर फैलाना शुरू किया, परिवार का प्रेम कम होता चला गया। आज हालात तो यह है कि लोग धन-संपत्ति के लिए अपने ही परिवार के सदस्यों का खून करने पर आमादा हैं। भाई-भाई का हत्यारा बना हुआ है। 

हरियाणा में संपत्ति और धन के लालच में होने वाली हत्याएं एक गंभीर सामाजिक मुद्दा बनी हुई हैं। हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां पारिवारिक विवाद, जमीन के सौदे और पैसों के लेनदेन के कारण हिंसक वारदात हुई हैं। शनिवार को ही अंबाला जमीन और मिट्टी खनन के ठेके के विवाद में एक युवक ने अपनी 95 वर्षीय दादी, सगे भाई और चाचा की गोली मारकर हत्या कर दी। चाची अस्पातल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। यह विवाद लंबे समय से चल रहे पारिवारिक संपत्ति बंटवारे से जुड़ा था। हत्या के आरोपी युवक के पिता को सेवानिवृत्त होने के बाद सारे फंड वगैरह मिलाकर 16 लाख रुपये मिले थे। 

इस पैसे और मिट्टी खनन के ठेके में युवक का बड़ा भाई अपना हिस्सा मांग रहा था। यह बात उसे स्वीकार नहीं थी। वह चाहता था कि सारे रुपये और मिट्टी खनन से होने वाली आय उसके या पिता के पास ही रहे। शनिवार को अंबाला के शहजादपुर प्रखंड के बिचपड़ी गांव में युवक ने धन और संपत्ति के लिए खूनी खेल खेला और हत्या के बाद से आरोपी युवक फरार है। स्वाभाविक है कि पुलिस कुछ ही दिनों में आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लेगी। इस हत्याकांड के लिए उसे जेल में रहना पड़ेगा। 

तीन लोगों की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास या फांसी की सजा भी मिल सकती है। यह तो तय है कि जिस संपत्ति और धन के लिए उसने हत्याकांड को अंजाम दिया है, उसका उपभोग वह खुद नहीं कर पाएगा। अगर युवक अपने अंजाम के बारे में सोच लेता, तो शायद हत्याकांड सामने नहीं आता। भाई और चाचा का परिवार बरबाद नहीं होता। भाई और चाचा के बच्चे अनाथ नहीं होते। शहरीकरण और विकास परियोजनाओं के कारण हरियाणा में जमीन की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं, जिससे छोटे-छोटे टुकड़ों के लिए भी खूनी संघर्ष हो रहे हैं। पुश्तैनी संपत्ति के बंटवारे में असमानता या असंतोष अक्सर हिंसा का रूप ले लेता है। 

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