Sunday, May 31, 2026

अस्पताल गेट पर होने वाला प्रसव नारी गरिमा के साथ खिलवाड़

अशोक मिश्र

प्रकृति ने संतान को जन्म देने और वंश को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी मादाओं को सौंपी है। हर मादा को प्रकृति द्वारा सौंपा गया यह गुरुतर दायित्व उसे महान बनाता है। प्रसव नर जीवों पर मादा द्वारा किया गया सबसे बड़ा एहसान है। विज्ञान कहता है कि जब कोई स्त्री बच्चे को जन्म देती है, तो उसे 57 डेल दर्द (दर्द मापक इकाई) होता है। यह दर्द एक साथ बीस हड्डियों के टूटने के बराबर माना गया गया है। ऐसी स्थिति में अगर किसी महिला को प्रसव के दौरान उचित चिकित्सा सुविधा न मिले, तो कल्पना की जा सकती है कि उसने कितनी पीड़ा सही होगी। 

फरीदाबाद के सेक्टर तीन के प्रजनन एवं स्वास्थ्य शिशु केंद्र में 15-16 मई की रात एक महिला को अस्पताल के पार्किंग में बच्चे को जन्म देना पड़ा। परिजन जब गर्भवती स्त्री को लेकर अस्पताल पहुंचे थे, तो अस्पताल का गेट बंद था। पीड़ा बढ़ने पर मजबूरन स्त्री को प्रसव के लिए पार्किंग एरिया में ले जाना पड़ा और टार्च की रोशनी में उसकी सास ने प्रसव कराया। प्रसव होने के करीब आधे घंटे बाद स्टाफ नर्स और अन्य लोग पहुंचे। मां बनना हर स्त्री का सपना होता है। मातृत्व सुख से बढ़कर किसी स्त्री के लिए दूसरा कोई सुख नहीं होता है। 

ऐसी स्थिति में महिला को यदि पार्किंग के खुले वातावरण में प्रसव के लिए मजबूर होना पड़े, तो उसके लिए कितना कष्टकारक रहा होगा। उस स्त्री की गरिमा को तार-तार होना पड़ा। किसी भी लोकतांत्रिक देश में गर्भवती स्त्री को प्रसव के लिए तत्काल, सुरक्षित और गरिमापूर्ण चिकित्सा सुविधा उसका मानवीय अधिकार होता है। अस्पताल में कार्यरत नर्स और चिकित्सकों की लापरवाही के कारण महिला की गरिमा को क्षति पहुंची। अब मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को लेकर सीएमओ को  नोटिस जारी करके स्पष्टीकरण मांगा है। 

हर बार की तरह इस मामले में भी कुछ दिन हो-हल्ला मचेगा, फिर सब कुछ शांत हो जाएगा, लेकिन जिस महिला को यह कष्ट झेलना पड़ा है, वह इस घटना को आजीवन नहीं भूल पाएगी। आमतौर पर देखा जाता है कि सरकारी अस्पतालों के बाहर प्रसव (डिलीवरी) होने और अव्यवस्था की स्थिति का मुख्य कारण रात के समय आपातकालीन सेवाओं में लापरवाही, चिकित्सा स्टाफ की कमी और उचित समन्वय का अभाव है। रात के समय अस्पतालों के आपातकालीन वार्ड या लेबर रूम भी बंद पाए जाते हैं।

 ऐसी स्थिति में जरूरत पड़ने पर जल्दी से गेट भी नहीं खुलता है जिसकी वजह से कई बार महिला को गेट पर ही या अस्पताल परिसर में ही कहीं खुले में प्रसव के लिए मजबूर होना पड़ता है। कई मामलों में मरीज को समय पर एम्बुलेंस तक नहीं मिल पाती है जिससे ऐसी स्थिति पैदा होती है। कई बार अंतिम समय में बड़े अस्पताल के लिए रेफर करने पर हालात विकट हो जाते हैं और अस्पताल आने-जाने के दौरान रास्ते में ही प्रसव हो जाता है।

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