Sunday, June 14, 2026

अभी से पानी नहीं बचाया तो निकट भविष्य में होगी भारी परेशानी


अशोक मिश्र

हरियाणा में गर्मी के दिनों पेयजल की किल्लत हर साल होती है। हालात कितने चुनौतीपूर्ण हैं, इसको इस बात से समझा जा सकता है कि शुक्रवार को अरावली गोल्फ क्लब में विधायक धनेश अदलखा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में एक पार्षद ने तो यहां तक कहा कि वार्ड में पेयजल की समस्या का समाधान न होने की वजह से मैंने अपने वार्ड में ही जाना छोड़ दिया है। 

बता दें कि कुछ दिनों पहले सीएम नायब सिंह सैनी ने एफएमडीए और नगर निगम को पूरे जिले में बराबर पानी वितरण का आदेश दिया था। नगर निगम ने नया शिड्यूल भी जारी किया था। यह राज्य के किसी एक जिले की हालत नहीं है। लगभग सभी जिले पानी की किल्लत झेल रहे हैं। दरअसल, राज्य में पानी की उपलब्धता कम और मांग ज्यादा है। ऐसी स्थिति में स्थानीय प्रशासन सबको जरूरत के मुताबिक पेयजल उपलब्ध करा पाने में नाकाम साबित हो रहा है। 

हरियाणा में हर साल लगभग 14 अरब घन मीटर का भारी जल घाटा है। प्रदेश में जहाँ कुल मांग 34.96 बीसीएम यानी अरब घन मीटर के मुकाबले उपलब्धता केवल 20.93 बिलियन क्यूब मीटर है। 14 अरब घन मीटर पानी की कमी को पूरा कर पाना काफी मुश्किल हो रहा है। पूरे राज्य में तेजी से गिरता भूजल स्तर और नहरी पानी की सीमित आपूर्ति लोगों की मुख्य जरूरत और पेयजल किल्लत की जड़ हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। राज्य के कई जिलों में भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन हो रहा है, जबकि वर्षा के माध्यम से उसकी भरपाई पर्याप्त नहीं हो पा रही है। भूजल का अत्यधिक दोहन राज्य के लिए सबसे बड़ा संकट है। 

राज्य के कई जिले जैसे महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, भिवानी, हिसार, फरीदाबाद और सिरसा अत्यधिक डार्क जोन में आ चुके हैं। सेंट्रल और वेस्टर्न हरियाणा के कई जिलों में भूजल स्तर नीचे जा रहा है क्योंकि यहां का पानी अच्छी गुणवत्ता का है और उसका लगातार अधिक उपयोग किया जा रहा है। सिरसा, हिसार, जींद, कुरुक्षेत्र, कैथल और महेंद्रगढ़ जैसे जिलों में भूजल दोहन की दर अधिक है, जबकि वर्षा से उसकी भरपाई पर्याप्त नहीं हो पा रही है। हरियाणा में पीने का पानी का अधिकतर हिस्सा पड़ोसी राज्य पंजाब से नहरों के माध्यम से मिलता है जिसे तलघरों में इकट्ठा किया जाता है।

जब पड़ोसी राज्यों से पानी आपूर्ति में बाधा आती है, तो राज्य में जल संकट खड़ा हो जाता है।  जल संरक्षण और मांग को संतुलित करने के लिए, हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण ने 'जल न्याय' के तहत एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। प्रदेश सरकार अपने स्तर पर हालात से निपटने का हर संभव प्रयास कर रही है। ऐसी स्थिति में नागरिकों का भी कर्तव्य है कि वह सरकार का साथ दें और पानी को हर हालत में बचाएं।

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