Tuesday, June 9, 2026

दो पहाड़ों के बीच काटकर बना दिया रास्ता

प्रतीकात्मक चित्र

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

अगर मन में लगन और विश्वास पक्का हो, तो कोई भी काम असंभव नहीं होता है। बस व्यक्ति को कभी अपने फैसले से विचलित नहीं होना चाहिए। जीवन में सफलता तभी मिलती है, जब व्यक्ति अपना हौसला कायम रखता है। इस संबंध में हिमाचल प्रदेश की एक कथा है। कहते हैं कि हिमाचल प्रदेश के किसी पहाड़ी गांव में एक बुजुर्ग रहता था। उसके दो बेटे थे। 

बेटे बहुत अधिक परिश्रम और आज्ञाकारी थे। गांव भर के लोग उस बुजुर्ग को महामूर्ख कहकर बुलाते थे क्योंकि वह लोगों को जो भी सलाह देता था, लोगों को उसकी सलाह अटपटी लगती थी। उस बुजुर्ग का जहां घर था, उसी घर के सामने से रास्ता जाता था। उसके घर के सामने ही दो बड़े पहाड़ थे जिनसे होकर दूसरी तरफ जाने में लोगों को कई दिन लग जाते थे। 

एक दिन उसने अपने दोनों बेटों को बुलाया और कहा कि इन दोनों पहाड़ों के बीच से रास्ता बनाना है। पिता की आज्ञा मानते हुए दोनों बेटों ने फावड़ा उठा लिया। बुजुर्ग भी हलका फावड़ा लेकर पहाड़ी से रास्ते बनाने में जुट गया। गांव के लोगों ने जब  उन तीनों को देखा, तो मजाक उड़ाने लगे। बुजुर्ग ने कहा कि भले ही मेरी जिंदगी में यहा रास्ता न बन पाए, लेकिन यह काम मेरे दोनों बेटे पूरा करेंगे। बेटों से यह काम पूरा नहीं हुआ, तो मेरी आने वाली पीढ़ी इसे पूरा करेगा। 

कुछ दिन तक पिता-पुत्र अपने काम में जुटे रहे। फिर धीरे-धीरे गांव वालों ने भी मदद करनी शुरू कर दी। देखते ही देखते कुछ ही महीनों में दोनों पहाड़ों के बीच से एक रास्ता तैयार हो गया। लोगों ने अब यह समझ लिया था कि यदि लगन सच्ची हो, तो पहाड़ को भी काटकर रास्ता बनाया जा सकता है। उसी दिन से बुजुर्ग लोगों की श्रद्धा का पात्र बन गया।

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