Wednesday, June 24, 2026

एक दीपक से जले सैकड़ों दीपक

 बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

दुनिया में जितने भी बदलाव हुए हैं, उनकी शुरुआत एक छोटे से कदम से ही हुई है। किसी भी देश, समाज में जब भी क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है, तो उसके पीछे किसी व्यक्ति का छोटा सा प्रयास ही रहा होगा। इसके बाद उस व्यक्ति के साथ लोग जुड़ते गए होंगे और समाज, देश में बहुत भारी परिवर्तन आया होगा। यह बात ध्रुव सत्य है। बदलाव की प्रक्रिया किसी एक से शुरू होती है और वह पूरे समाज को प्रभावित करती है। 

इस संबध में एक बहुत ही रोचक प्रसंग है। किसी गांव में एक बुजुर्ग रहता था। वह घोर आशावादी था। निराशा के क्षणों में भी वह आशा का दामन नहीं छोड़ता था। वह शाम होने पर अपने घर के दरवाजे पर रोज एक दीपक जलाता था। लोग उसको पागल समझते थे। बुजुर्ग दीपक जलाने के बाद उसे देखता रहता था, जब तक दीपक बुझ नहीं जाता था। 

एक दिन एक युवक से रहा नहीं गया और वह बुजुर्ग के पास पहुंचकर उससे बोला, बाबा! केवल एक दीपक जलाने से क्या होगा? पूरे गांव में तो रोशनी नहीं हो जाएगी। बुजुर्ग ने मुस्कुराते हुए कहा कि अंधेरा खत्म करना मेरा काम नहीं है। दीपक जलाने से कम से कम कहीं तो उजाला है। 

एक दिन गांव में बहुत तेज आंधी आई। लोगों ने देखा कि बुजुर्ग का दीपक तेज आंधी में भी जल रहा है। युवक फिर बुजुर्ग के पास गया और पूछा, बाबा! आपका दीपक कैसे जल रहा है? बुजुर्ग ने कहा कि मैंने अपने दोनों हाथों से दीपक को बुझने से बचाया था।  युवक ने कहा कि बाबा, इस एक दीपक से पूरी दुनिया का अंधेरा दूर नहीं हो सकता। 

बुजुर्ग ने कहा कि मेरे मन में तो अंधेरा नहीं है। इससे प्रभावित होकर युवक ने भी दीपक जलाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते कुछ दिनों में सभी गांव वालों ने दीपक जलाना शुरू कर दिया। कल तक जो गांव अंधेरे में डूबा रहता था, आज वह दीपकों की रोशनी से जगमगा रहा था।

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