Sunday, June 14, 2026

गलती मान लेने वाले लोग बड़ा काम करते हैं

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

महात्मा गांधी ने अपने राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले को समर्पित एक पुस्तक लिखी थी जिसका नाम है धर्मात्मा गोखले। गोखले कांग्रेस में नरम दल के नेता माने जाते थे। उन्हें भारत को स्वाधीन कराने के लिए प्रतिक्रियावादी या क्रांतिकारी तरीका पसंद नहीं था। 

यही वजह है कि वह गरम दल के नेताओं के विचारों के विरोधी थे। इसके बावजूद जब 1907 में गरम दल के नेता लाला लाजपत राय को अंग्रेजों ने म्यामार के माडले जेल में कैद कर लिया, तो गोखले ने उनकी रिहाई के लिए आंदोलन चलाया था। गोखले का जन्म 9 मई, 1866 को वर्तमान महाराष्ट्र (तत्कालीन बॉम्बे प्रेसीडेंसी का हिस्सा) के कोटलुक गाँव में हुआ था।

इनके बचपन का एक किस्स है। हुआ यह कि एक दिन गणित के अध्यापक ने क्लास में सभी बच्चों को एक सवाल हल करने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि जो इस सवाल को हल कर लेगा, उसे पुरस्कार दिया जाएगा। सभी बच्चे सवाल हल करने लगे। लेकिन किसी को इसका हल नहीं सूझ रहा था। सवाल वाकई कठिन था। क्लास में काफी सन्नाटा था। काफी देर गोखले अपनी सीट से उठे और अध्यापक को अपनी कापी सौंप दी। अध्यापक ने देखा कि सवाल का उत्तर वाकई सही था। 

अगले दिन जब पुरस्कार देने की बारी आई, तो गोखले अपने अध्यापक के पैरों से लिपट गए और रोते हुए बोले, मैं इस पुरस्कार के लायक नहीं हूं क्योंकि मैंने उस सवाल का उत्तर किताब से नकल किया था। अध्यापक ने कहा कि मुझे दुख इस बात का नहीं है कि तुमने उत्तर नकल किया। लेकिन इस बात की खुशी है कि तुमने आखिर में सच बोल दिया। गलती मान लेने वाले लोग जीवन में कुछ बड़ा काम करते हैं।

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