Thursday, June 11, 2026

राजा को योग्य उम्मीदवार की तलाश

 

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

इंसान को अपनी भलाई के साथ दूसरों की भलाई का ध्यान रखना चाहिए। यदि मनुष्य ऐसा करता है, तो वह सबका प्यारा हो जाता है। लोग उसका आदर करते हैं और ऐसा व्यक्ति जीवन में सफल भी होता है। अपनी भलाई के बारे में सोचना, कोई बुरी बात नहीं है। सभी अपना भला चाहते हैं, लेकिन इंसानियत के नाते दूसरों का भला भी सोचना चाहिए। एक बार की बात है। 

एक राजा का मंत्री सेवानिवृत्त हो गया। वह काफी बूढ़ा हो गया था। राजा को उस पर विश्वास भी बहुत था क्योंकि वह राजा की सेवा में काफी दिनों से था और वह राजा को सलाह भी अच्छी दिया करता था। अब राजा को अपने मंत्री के समान ही बुद्धिमान और सच्चे मंत्री की जरूरत महसूस होने लगी। उसने अपने बुजुर्ग मंत्री की सलाह पर कई योग्य उम्मीदवारों की परीक्षा ली। उस परीक्षा में राज्य के हजारों युवा शामिल हुए। 

परीक्षा के कई चक्र से गुजरते हुए तीन उम्मीदवार चयनित हुए जिनमें से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता था। राजा इन उम्मीदवारों को लेकर ऊहापोह में था कि वह किसका चयन करे। उसने अपने दरबारियों से सलाह मशविरा किया। सारे दरबारी एक मत नहीं हो पाए। तब राजा को अपने सेवानिवृत्त मंत्री की याद आई।  उन्होंने हमेशा उन्हें संकट से उबारा था। 

बुजुर्ग मंत्री ने राजा को उपाय बताया। राजा ने तीनों को बुलाकर एक ही सवाल किया-यदि मेरे और तुम्हारे बालों में आग लग जाए तो तुम क्या करोगे। एक ने उत्तर दिया कि मैं सबसे पहले आपके बालों की आग को बुझाऊंगा। दूसरे ने कहा कि मैं सबसे पहले अपनी आग को बुझाऊंगा। तीसरे ने कहा कि मैं एक हाथ से अपनी आग बुझाऊंगा और दूसरे हाथ से  आपके बालों में लगी आग को बुझाऊंगा। 

राजा ने तीसरे को अपना मंत्री बना लिया। राजा ने कहा कि पहले वाला चापलूस है। दूसरा वाला स्वार्थी है। तीसरा वाला अपने साथ-साथ दूसरों का भी भला सोचता है। यही योग्य है।

No comments:

Post a Comment