अशोक मिश्रफरीदाबाद के मेवला महाराज औद्योगिक क्षेत्र में गुरुवार को आग लगने से जूता फैक्टरी का गोदाम जलकर खाक हो गया। हालांकि राहत की बात यह है कि आग लगने से किसी की मौत नहीं हुई है। गर्मी के दिनों में हरियाणा में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। घर, फैक्टरी, होटल, दुकान, खेत में पड़ी फसल आदि में थोड़ी सी लापरवाही के चलते आग विकराल रूप धारण कर लेती है। गरमी के दिनों में आग लगने का कारण किसानों का गेहूं के अवशेष को खेत में ही जला देना भी है।
किसान गेहूं के अवशेष का दूसरा उपयोग करने की जगह जब जला देते हैं, तो हवा के माध्यम से उड़ने वाली चिन्गारी दूसरे खेतों में रखी फसल, फसल के अवशेष आदि को भारी नुकसान पहुंचाती है। पिछले वर्ष की तुलना में वर्ष 2026 में गेहूं की कटाई के मौसम में हरियाणा में खेतों में आग लगने की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस वर्ष मामलों की संख्या 2025 की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई है। पिछले साल राज्य में 1,745 घटनाएं दर्ज की गई थीं। इस साल 1,610 मामलों की यह वृद्धि मात्र एक वर्ष में लगभग 92 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाती है। इससे पर्यावरण प्रदूषण और पराली जलाने पर रोक लगाने संबंधी नियमों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
हरियाणा में 2024 में 3077, 2023 में 1887 और 2022 में 2872 कृषि अग्निकांड हुए थे। खेतों में आग लगने के मामले में अधिकारी मानते हैं कि खेतों में आग लगने की अधिकतर घटनाएं आकस्मिक थीं और शॉर्ट सर्किट के कारण हुईं। हां, कुछ मामलों में किसानों ने जानबूझकर पराली में आग लगाई, जो बाद में तेज गर्म हवाओं और शुष्क मौसम के कारण आसपास के खेतों में तेजी से फैल गई। गर्मी के मौसम में वातावरण शुष्क होने की वजह सेआग बड़ी तेजी से फैलती है।
घर, फैक्टरी, होटल या दूसरी जगहों पर लोगों की लापरवाही के चलते आग लग जाती है। कई बार बिजली के तारों की वजह से पैदा हुई चिन्गारी सब कुछ स्वाहा कर देती है। मार्च से लेकर जून-जुलाई तक सबसे ज्यादा आगजनी की घटनाएं होती हैं। ऐसी स्थिति में अग्नि शमन एवं आपातकालीन सेवाओं का महत्व काफी बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में सरकार को चाहिए कि वह दमकल विभाग को पर्याप्त कर्मचारी, आधुनिक संसाधन और मजबूत व्यवस्था उपलब्ध कराए।
वर्तमान में प्रदेश में 89 फायर स्टेशन संचालित हैं, जो मुख्यत: शहरी क्षेत्रों तक सीमित हैं। कस्बों, उपमंडलों, ग्रामीण इलाकों और नए औद्योगिक क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा के संसाधन अपेक्षाकृत कम हैं। इस स्थिति से बचने के लिए सैनी सरकार ने 59 नए फायर स्टेशन खोलने का फैसला लिया था। इस योजना पर तेजी से काम चल रहा है। इससे आपात स्थितियों में रिस्पॉन्स टाइम में उल्लेखनीय कमी आएगी। योजना का सबसे बड़ा प्रभाव एनसीआर क्षेत्र में दिखेगा, जहां 20 नए फायर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
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