Tuesday, June 16, 2026

बेसहारा पशुओं की सड़कों पर धमाचौकड़ी, हादसों का डर

अशोक मिश्र

हरियाणा के किसी भी जिले की सड़क पर एक घंटा घूम आइए, कोई न कोई बेसहारा पशु सड़कों पर मिल ही जाएगा। बेसहारा पशु जिसमें गौवंश, सांड और कुत्ते आते हैं, हर सड़क पर लोगों को परेशान करते और डराते हुए मिल जाएंगे। वैसे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कई बार हरियाणा की सड़कों को बेसहारा पशुविहीन करने का दावा कर चुके हैं, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिल पाई है। 

एक अनुमान के मुताबिक केवल फरीदाबाद शहर में ही करीब दस हजार बेसहारा पशु सड़कों पर घूमते हैं। राज्य की सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा पशु ट्रैफिक में बाधा तो बनते ही हैं, लोगों के लिए जानलेवा भी साबित होते हैं। बेसहारा पशु सड़कों पर अचानक दौड़ पड़ते हैं जिससे सड़कों पर चल रहे वाहन चालक हड़बड़ा जाते हैं और हादसा कर बैठते हैं। इन पशुओं के आगे पीछे चल रहे लोग भी चपेट में आकर या तो अपनी जान गंवा बैठते हैं या फिर जीवन भर के लिए दिव्यांग हो जाते हैं।

राज्य में पिछले पांच वर्षों में आवारा पशुओं के कारण हुए हादसों में नौ सौ से अधिक लोगों की मौत हुई है और तीन हजार से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। पिछले पांच साल में हुए आंकड़ों को देखा जाए तो राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार हरियाणा में 3300 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। हर महीने औसतन 10 लोगों की मौत बेसहारा पशुओं के हमलों या उनसे टकराने के कारण हुई है। शहरी क्षेत्रों में आवारा कुत्तों और गायों के कारण प्रतिदिन औसतन 15 से ज्यादा शिकायतें हेल्पलाइन पर आती हैं। बेसहारा पशुओं में आने वाले कुत्ते भी लोगों के लिए भारी मुसीबत का कारण बन रहे हैं। 

प्रदेश में कई लाख कुत्ते ऐसे हैं जो सड़कों पर आवारा घूमते हैं। यह कई बार झुंड बनाकर बच्चों और बुजुर्गों पर हमला करते हैं। ऐसे हमलों में काफी लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। पिछले दिनों सुप्रीमकोर्ट ने भी हस्तक्षेप करके सड़कों पर घूमने वाले कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने का आदेश जारी किया है। सड़कों पर घूमने वाले कुत्तों के बंध्याकरण का भी निर्देश दिया है। 

कोर्ट के निर्देश पर हरियाणा सरकार भी बेसहारा पशुओं से होने वाले हादसों में मरने और घायल होने वालों को मुआवजा देती है।  हरियाणा में बेसहारा पशुओं के हमले या काटने से होने वाली मौतों और गंभीर चोटों पर हाईकोर्ट के आदेशानुसार आर्थिक मुआवजा (कुत्ते के काटने पर दस हजार रुपये और हमले में चोटिल होने पर बीस हजार रुपये तक) देने का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में आवारा पशुओं को पकड़कर नंदीशालाओं और गौशालाओं में भेजने के लिए राज्य में लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके बावजूद बेसहारा पशुओं के हमले रुक नहीं रहे हैं। इसका कारण यह है कि बेसहारा पशुओं की संख्या बहुत अधिक है और नंदीशालाओं-गौशालाओं में जगह कम है।

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