बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
वैसे तो रूस में कई महान साहित्यकार हुए हैं जिन्होंने अपने समय की सामाजिक स्थिति को अपनी रचनाओं में उकेरा है। ऐसे ही दो महान साहित्यकार अन्तोन पाव्लविच चेखव और मैक्सिम गोर्की ने अपनी रचनाओं से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था। चेखव कथाकार होने के साथ-साथ नाटककार भी थे। मैक्सिम गोर्की और अन्तोन पाव्लविच चेखव में समानता यह थी कि दोनों ने समाज के दबे कुचले लोगों को अपनी रचनाओं का आधार बनाया। मैक्सिम गोर्की ने तो अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया था।चेखव के मामले में ऐसी बात नहीं थी। उन्होंने चिकित्सक होते हुए भी साहित्य रचना की। गोर्की चेखव की बड़ी इज्जत करते थे। एक बार गोर्की अपने समकालीन साहित्यकार चेखव से मिलने उनके घर गए। दोनों में काफी बातें हुईं। बातचीत के दौरान गोर्की ने चेखव से पूछा कि समाज के विभिन्न वर्गों में से किस वर्ग को सबसे ज्यादा प्रमुखता देते हैं।
चेखव कुछ देर तक सोचते रहे, फिर बोले कि मैं सबसे ज्यादा तवज्जो शिक्षकों को देता हूं। शिक्षक निस्संदेह पूजनीय और सर्वश्रेष्ठ होते हैं। गोर्की ने पूछा कि शिक्षक में ऐसी क्या खास बात है? चेखव ने कहा कि शिक्षक के ही कंधे पर यह दायित्व होता है कि वह किसी भी देश के बच्चों को पढ़ाकर योग्य नागरिक बनाए। गोर्की ने पूछा कि तो आप शिक्षकों के लिए क्या करना चाहते हैं?
चेखव ने कहा कि यदि मेरे पास बहुत सारा पैसा हो, तो मैं शिक्षकों के लिए मकान के साथ-साथ एक बहुत बड़ा पुस्तकालय बनवा दूं ताकि वह अपने शिष्यों को बेहतरीन शिक्षा दे सकें। चेखव की यह बात सुनकर गोर्की काफी प्रसन्न हुए। चेखव ने 44 साल की उम्र में ही दुनिया को अलविदा कह दिया था।

No comments:
Post a Comment