Monday, June 29, 2026

कांग्रेस के नए प्रदेश प्रभारी के सामने चुनौतियां ही चुनौतियां


अशोक मिश्र

हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी रहे बीके हरिप्रसाद के कर्नाटक के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उनकी जगह संजय दत्त को लाया गया है। कांग्रेस में इन दिनों बदलाव की बयार बह रही है। कांग्रेस हाईकमान ने 26 जून को उत्तर प्रदेश, हरियाणा और ओडीसा में नए प्रदेश प्रभारी नियुक्त किए  हैं। इसमें सबसे ज्यादा आश्चर्यजनक उत्तर प्रदेश में किया गया बदलाव माना जा रहा है। पार्टी ने अविनाश पांडेय को हटाकर राजेंद्र पाल गौतम को नया प्रभारी नियुक्त किया है। गौतम दलित समुदाय से हैं और माना जा रहा है कि वह कांग्रेस के साथ दलित समुदाय को जोड़ने में सफल हो सकते हैं। राजेंद्र पाल गौतम आम आदमी पार्टी से आए हैं। 

उत्तर प्रदेश कांग्रेस में अविनाश पांडेय को हटाने को लेकर असंतोष की लहर दिखाई दे रही है। जहां तक हरियाणा की बात है। बीके हरिप्रसाद के स्थान पर संजय दत्त की नियुक्ति से बहुत ज्यादा फर्क पड़ता हुआ नहीं दिखाई दे रहा है। संजय दत्त महाराष्ट्र से हैं और कांग्रेस में वह कई पदों पर काम कर चुके हैं। संजय दत्त के सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस कार्यकर्ताओं का विश्वास जीतना और उनके विश्वास को कायम रखना है ताकि वह खुले मन से काम कर सकें। 

संजय दत्त के सामने इससे भी बड़ी चुनौती हरियाणा कांग्रेस में सक्रिय गुटों को एक मंच पर लाकर उनमें समन्वय स्थापित करना है। सन 2024 में विधानसभा चुनावो के दौरान भूपेंद्र हुड्डा, कुमारी सैलजा, रणदीप सुरजेवाला तीनों अपने को सीएम पद का दावेदार बताते हुए थक नहीं रहे थे। इन तीनों गुटों के कांग्रेस में अपने-अपने विधायक हैं और अपने जिलाध्यक्ष। हरियाणा कांग्रेस की सबस बड़ी दिक्कत यही है कि जैसे ही प्रदेश कांग्रेस में अध्यक्ष या प्रभारी की नियुक्ति होती है, उस पर किसी न किसी गुट का ठप्पा लग जाता है। उसे हुड्डा, सैलजा या सुरजेवाला गुट का बताने की मुहिम शुरू हो जाती है। 

सब उसे अपने-अपने पाले में खींचने में लग जाते हैं। संजय दत्त के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह इन तीनों गुटों को एक मंच पर लाकर खड़ा कर पाते हैं या नहीं। यदि तीनों गुट एक साथ मिल जुलकर काम करें, तो सन 2029 का चुनाव जीतना मुश्किल नहीं होगा। लेकिन सबसे बड़ा मुद्दा संगठन है। अधिकतर जिलों में जिलाध्यक्ष की नियुक्ति ही नहीं हुई है। जिला, ब्लॉक, न्याय पंचायत स्तर पर संगठन है ही नहीं। ऐसी स्थिति में विधानसभा चुनाव में सफलता हासिल होगी, कहना मुश्किल है। 

वैसे तो हरियाणा के नए प्रदेश प्रभारी संजय दत्त के पास खोने को कुछ नहीं है। उन्हें सब कुछ जीरो से शुरू करना है। अगर वह प्रदेश में संगठन खड़ा करने में सफल हो गए, तो उनके सामने किसी प्रकार की शायद ही कोई चुनौती खड़ी होगी। सबसे बड़ी बात तो यह है कि वह कांग्रेस हाईकमान को निष्पक्षता से हरियाणा कांग्रेस की वर्तमान हालत बता पाते हैं या नहीं।

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