Thursday, June 18, 2026

जोड़ने वाले को सिर पर बिठाना चाहिए

प्रतीकात्मक चित्र

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

जो समाज और देश को जोड़े रखता है, वह और कुछ न करते हुए भी आदरणीय होता है। घर, परिवार, समाज और देश जब जुड़ा रहेगा, तो उस देश की उन्नति होगी। लोग समृद्ध होंगे। व्यापार फले-फूलेगा। लोगों को मधुर वाणी और सद्कर्मों से जोड़ा जा सकता है। दुनिया में जितने भी महान व्यक्ति हुए हैं, उन्होंने हमेशा देश और समाज को जोड़ने की बात की है। 

इस संबंध में एक बहुत ही रोचक कथा सुनाता हूं। किसी शहर में एक दर्जी रहता था। वह अपनी दुकान पर आते समय अपने बेटे को भी साथ ले लेता था। बेटे का स्कूल रास्ते में ही पड़ता था। पहले वह अपने बेटे को स्कूल छोड़ता और फिर दुकान पर चला आता। अपना काम करता। एक दिन उसके बेटे के स्कूल में जल्दी छुट्टी हो गई तो वह अपने पिता की दुकान पर चला गया। 

उसने देखा कि उसके पिता कैंची से नाप के अनुसार कपड़े काट रहे हैं। कभी कपड़े को इधर काटते हैं, तो कभी उधर। कपड़े काटने के बाद वह कैंची को अपने पैर के नीचे दबा लेते हैं। इसके बाद वह कपड़े की सिलाई करने लगते हैं। सुई में धागा डालने के बाद कपड़े की सिलाई करते हैं। सिलाई के दौरान यदि कपड़े की कतरब्योंत करनी हो, तो सुई को अपने सिर की टोपी में खोंस लेते हैं। जब तक बेटा अपने पिता की दुकान में रहा, यही देखता रहा। 

चलते समय उसने पूछा, पिताजी! कैंची को तो आप पैर के नीचे दबा लेते हैं, लेकिन सुई को टोपी में क्यों खोंस लेते हैं। पिता ने गंभीर होकर कहा, बेटा! कैंची हमेशा काटने का काम करती है, लेकिन सुई हमेशा जोड़ती है। काटने वाले को हमेशा पैरों के नीचे दबा कर रखना चाहिए, लेकिन जो जोड़ता है, उसे सिर माथे पर बिठाना चाहिए।

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