Friday, June 5, 2026

जीवन के अनुभवों से सीखा लिखना

 बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

कहते हैं कि कलम में बहुत ताकत होती है। लेखनी की बदौलत किसी देश की सत्ता बदली जा सकती है, तो किसी गलत नियमों को बदलने पर शासन को मजबूर किया जा सकता है। अमेरिकी उपन्यासकार अपटन बिल सिनक्लेयर जूनियर का उपन्यास द जंगल जब प्रकाशित हुआ, तो अमेरिकी जनता में काफी रोष फैल गया। 

उपन्यास में मांस पैकिंग उद्योग में श्रम और स्वच्छता की खराब स्थितियों को वर्णन किया गया था। बाद में सरकार ने नियम बनाकर मांस पैकिंग उद्योग में स्वच्छता का पालन करवाया। सिनक्लेयर के पिता शराब व्यवसायी थे। वह खुद भी इतना ज्यादा शराब पीते थे कि वह अपना व्यवसाय चौपट कर बैठे थे। नतीजा यह हुआ कि दस साल की उम्र तक सिनक्लेयर को स्कूल जाने का मौका नहीं मिला। 

लेकिन पढ़ने-लिखने की लगन के चलते तमाम परेशानियों के बावजूद उन्होंने कालेज तक की पढ़ाई की। कालेज की फीस चुकाने के लिए सिनक्लेयर को सस्ती किताबों का लेखन भी करना पड़ा। वह दिन रात मिलाकर आठ हजार शब्द लिखने की कोशिश करते थे। उन्होंने सस्ते लेखन से एक अपार्टमेंट खरीदा और अपने माता-पिता को उसमें शिफ्ट किया। 

उन्होंने जून 1897 में सिटी कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। बाद में उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई की, लेकिन उनकी रुचि लेखन में अधिक थी। उन्होंने स्पेनिश, जर्मन और फ्रेंच सहित कई भाषाएँ सीखीं। वैसे तो उनके पहले चार उपन्यास खास लोकप्रिय नहीं रहे, लेकिन द जंगल ने उन्हें प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार दिलाया। नब्बे वर्ष की आयु में 25 नवंबर 1968 को उपन्यासकार अपटन सिनक्लेयर की मृत्यु हो गई।

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