अशोक मिश्र
कैथल में रेल इंजन की चपेट में आने से एक बुजुर्ग की मौत हो गई। सुबह पांच बजे वह आदमी नए रेलवे हाल्ट के नजदीक रेलवेलाइन से गुजर रहा था। जैसे ही वह व्यक्ति लाइन को पार करने लगा, इंजन की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई। ट्रेन के इंजन की चपेट में आकर अपनी जान गंवाने वाले व्यक्ति की पहचान पूंडरी निवासी साहब सिंह के रूप में हुई है। रेल लाइन पार करते समय होने वाला हादसा लोगों की लापरवाही और हड़बड़ी के कारण होता है।अकसर देखने में आता है कि ट्रेन के आने के समय रेलवे क्रांसिंग का फाटक बंद कर दिया जाता है। इसके बावजूद लोग अगर पैदल हैं, तो उसके नीचे से झुककर रेल पटरी को क्रास कर जाते हैं। दोपहिया वाहन को आड़ा-तिरछा करके निकालने की कोशिश की जाती है। ऐसी स्थिति में अकसर हादसे हो जाते हैं। लोग ध्यान नहीं देते हैं और जब तक रेल पटरी पार करते हैं, तब तक स्पीड से ट्रेन आ जाती है और लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं। हरियाणा में रेलवे ट्रैक पार करते समय हुए हादसों के अधिकांश मामले असावधानी, शॉर्टकट अपनाने और फुटओवर ब्रिज का इस्तेमाल न करने के कारण होते हैं।
सरकारी और फोरेंसिक आंकड़ों के अनुसार, इन हादसों में 80 प्रतिशत मौतें लापरवाही की वजह से होती हैं, जबकि बाकी बचे 20 प्रतिशत मामले आत्महत्या के होते हैं। देखने में यह आया है कि पारिवारिक कलह, प्रेम में असफल होने या किसी दूसरी तरह के दबाव के चलते जब आत्महत्या का रास्ता चुनते हैं, तो वह रेल की पटरी पर लेटकर अपनी जान गंवा देना आसान समझते हैं।
अगर हरियाणआ के मामलों का विश्लेषण किया जाए, तो रेल की पटरी पर मरने वाले कुल लोगों में से 92-96 प्रतिशत युवा पुरुष होते हैं। इनमें भी सबसे अधिक प्रभावित आयु वर्ग 21 से 40 वर्ष के बीच है। यह भी देखने में आया है कि 52-55 प्रतिशत ट्रैक हादसे शाम 6 बजे से लेकर सुबह 6 बजे के बीच होते हैं। इन बारह घंटों में रोशनी और दृश्यता सबसे कम होती है। इसके कारण रेल पार करते समय सामने से आ रही ट्रेन दिखाई नहीं पड़ती है और हादसा हो जाता है। इन हादसों में अधिकांश मौतों का कारण सिर पर गंभीर चोट या अंगों का कुचला जाना है। ऐसे हादसों में सबसे ज्यादा प्रभावित हिस्सा कमर से नीचे का अंग होता है।
हरियाणा में नहीं, बल्कि दूसरे प्रदेशों में लोग समय बचाने के लिए शॉर्टकट अपनाते हैं। लोग भारी सामान के साथ पैदल चलने में परेशानी होने या पैदल पार पुल तक जाने में दिक्कत या आलस के कारण अक्सर रेलवे ट्रैक पार करते हैं। कई जगहों पर रेलवे ट्रैक के आर-पार उचित पुल या सब-वे न होना भी इसका एक बड़ा कारण है। लोग निर्धारित पुल या सब-वे का उपयोग करने के बजाय एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म या कॉलोनी के दूसरी ओर जाने के लिए सीधा ट्रैक पार करना आसान समझते हैं।
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