Wednesday, June 10, 2026

घरेलू कलह और अवैध संबंधों की वजह से बिखर रहे हैं परिवार

अशोक मिश्र

परिवार टूट रहे हैं। घरेलू कलह और अवैध संबंधों की वजह से परिवार में बिखराव की प्रक्रिया पिछले कुछ दशकों से तेज हो गई है। तलाक के मामले बढ़ रहे हैं। सात जन्मों तक एक दूसरे का साथ निभाने की कसमें खाने वाले पति-पत्नी कुछ ही साल में एक दूसरे से अलग हो जाने के लिए अदालत या महिला आयोग का दरवाजा खटखटा रहे हैं। हरियाणा राज्य महिला आयोग के पास इन दिनों ज्यादातर मामले अवैध संबंधों और संपत्ति विवाद के आ रहे हैं। राज्य महिला आयोग के पास आने वाले मामलों में एक बात सबसे ज्यादा उभर कर सामने आई है और वह है अलगाव की मांग करने वाले ज्यादातर जोड़े प्रेम विवाह करने वाले हैं। 

हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष का तो यहां तक कहना है कि आयोग के पास पहुंचने वाले 60 प्रतिशत मामलों में युवक-युवतियां सोशल मीडिया से संबंध स्थापित किया था। सोशल मीडिया पर एक दूसरे के साथ परिचय हुआ। फिर दोनों आपस में मिलने जुलने लगे और परिवार की मर्जी के बिना या उन्हें सूचित किए बिना विवाह कर लिया। जब परिवार वालों ने विरोध किया, तो कोई एक पक्ष बहाना बनाकर विवाह से छुटकारा पाने के लिए आयोग या अदालत पहुंच गया।  

कई मामलों में विवाह का आश्वासन देकर संबंध बनाए जाते हैं और बाद में विभिन्न बहाने बनाकर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया जाता है। अवैध संबंध भी परिवार के टूटने का एक महत्वपूर्ण कारण है। भौतिक संसाधनों को जुटाने और रोजी-रोटी कमाने की आपाधापी में काफी लोग अपने परिवार को समय नहीं दे पाते हैं। ऐसी स्थिति में कुछ लोग अपने आफिस में या फिर बाहर संबंध बना लेते हैं। 

अवैध संबंधों का जब खुलासा होता है, तो फिर शुरुआत में कलह होती है और उसके बाद मामला मारपीट और हिंसा तक पहुंच जाता है। कई मामलों में हत्या जैसी घटनाएं भी हुई हैं। कुछ परिवार तो महज इसलिए भी टूट जाते हैं क्योंकि ससुराल के लोग अनावश्यक रूप से दंपति के मामलों में दखल देने लगते हैं। इससे लड़का या लड़की अपने को असहज महसूस करते हैं और अंतत: बात परिवार के बिखरने तक आ जाती है। पैतृक या निजी संपत्ति भी परिवार में बिखराव का बहुत बड़ा कारण है। 

हरियाणा में जमीन और प्रॉपर्टी की बेतहाशा बढ़ती कीमतों ने सगे-संबंधियों और भाइयों के बीच के रिश्तों को लालच में बदल दिया है, जिससे संपत्ति हड़पने की प्रवृति बढ़ी है। आयोग के सामने सास-बहू के झगड़ों की वजह से मायके में रह रही बहुओं के मामले भी पहुंचे। यहां आयोग के सामने ही सास-बहू के बीच नोक-झोंक देखने को मिली। यदि किसी परिवार में ऐसी स्थिति हो, तो सबसे बेहतर यही है कि सम्मानजनक तरीके मामले को सुलझाया जाए। यदि परिवार में अक्सर कलह रहता है, तो वैधानिक तरीके से अलग हो जाने में ही भलाई है।

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