अशोक मिश्र
हमारे देश में एक बहुत पुरानी कहावत है कि नीम हकीम खतरा-ए-जान। आधा अधूरा ज्ञान रखने वाला डॉक्टर या वैद्य मरीज की जान के लिए किसी खतरे से कम नहीं है। लेकिन हरियाणा में तो ऐसे लोग भी इलाज करते हुए पाए गए हैं जिनके पास आधा अधूरा भी ज्ञान नहीं है। फरीदाबाद के एसजीएम नगर में शाहीन बानू नामक महिला क्लीनिक चलाती हुई पकड़ी गई है जिसके पास कोई डिग्री, डिप्लोमा या सर्टिफिकेट नहीं थी।इस महिला के बारे में केंद्र सरकार के आनलाइन शिकायत पोर्टल पर किसी ने शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में गठित टीम ने शाहीन क्लीनिक पर छापा मारा, तब यह खुलासा हुआ कि महिला के पास शिक्षा या चिकित्सा से जुड़ा कोई भी कागज मौजूद नहीं है। उसके पास से भारी मात्रा में एलोपैथिक दवाएं भी बरामद हुई हैं। चिकित्सा के नाम पर भारी भरकम फीस वसूलने वाली महिला न जाने कितने लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर चुकी है।
हरियाणा में झोलाछाप या अनपढ़ लोग क्लीनिक खोलकर लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। प्रदेश में झोलाछाप डॉक्टरों का कोई आधिकारिक आंकड़ा तो उपलब्ध नहीं है क्योंकि इस तरह का सारा कारोबार चोरी-छिपे किया जाता है, लेकिन एक अनुमान के आधार पर बात कही जाए, तो पूरे प्रदेश में लगभग पचास से साठ हजार क्लीनिक ऐसे चल रहे हैं जिनके पास उपयुक्त डिग्री या डिप्लोमा नहीं है। प्रदेश में झोलाछाप डॉक्टरों की समस्या ग्रामीण और औद्योगिक इलाकों विशेषकर नूंह, पलवल और गुरुग्राम में गंभीर है। मेवात, नूंह, पलवल, फरीदाबाद और गुरुग्राम जैसे कई जिलों में इन अवैध क्लीनिकों की भरमार है।
ऐसे क्लीनिकों के फलने-फूलने का सबसे बड़ा कारण यह है कि प्रदेश में योग्य चिकित्सकों की भारी कमी है। सरकारी अस्पतालों की संख्या भी आबादी के अनुपात में काफी कम है। जो सरकारी अस्पताल हैं भी, उनमें या तो डॉक्टरों की कमी है या फिर समय पर उपलब्ध नहीं होते हैं। स्वास्थ्य केंद्रों में चौबीस घंटे सेवा का कोई व्यवस्था नहीं है। रात में इमरजेंसी के समय मरीज कहां जाए। निजी अस्पतालों में एक सामान्य सी बीमारी के लिए फीस और दवा के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है।
कमीशन के लिए निजी अस्पताल कई बार जरूरत से ज्यादा जांच लिख देते हैं जिससे मरीज परेशान हो जाता है। ऐसी स्थिति में गरीब और मध्यम आय वर्ग के लोग इन अवैध रूप से खुले क्लीनिकों की ओर रुख करते हैं। अवैध रूप से खुले क्लीनिक न केवल मरीजों की जान को जोखिम में डालते हैं, बल्कि इनका आर्थिक शोषण भी करते हैं। हजारों लोग रोज ऐसे कथित डॉक्टरों पर भरोसा कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग और सीएम फ्लाइंग स्क्वायड लगातार ऐसे क्लीनिकों पर छापा मारता रहता है, लेकिन ऐसे क्लीनिक रक्तबीज की तरह बढ़ते जा रहा है।
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