अशोक मिश्र
अधिकतर युवा इसका शिकार बन रहे हैं। माता पिता के साथ परिवारों की परेशानियां एक बड़े संकट के रूप में उभरने लगी है। चरखी दादरी जिले में बढ़ते नशे के खिलाफ समसपुर गांव के लोग बेमियादी धरने पर बैठ हुए हैं। धरना पिछले 13 दिनों से चल रहा है। फोगाट खाप के साथ-साथ आसपास के गांवों ने भी सामूहिक रूप से धरने का समर्थन किया है। राज्य में नशे का विस्तार बड़ी तेजी से हो रहा है।
पिछले दिनों महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी के सामने फतेहाबाद जिले की कुछ महिलाओं ने इस बात का खुलासा किया कि उन्होंने अपने पति और ससुराल वालों के नशा बेचने के विरोध में उन्हें छोड़ दिया है। अपने पति और ससुराल को छोड़ने पर अधिकारी इन महिलाओं की काउंसिलिंग कर रहे थे। हालांकि प्रदेश सरकार नशा तस्करी और नशीले पदार्थों की बिक्री रोकने की हर संभव कोशिश कर रही है। राज्य में नशा तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों के तहत पिछले पांच वर्षों में लगभग 33 हजार नशा तस्करों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
उन्हें जेल की सलाखों के पीछे बंद किया जा चुका है। नशीली दवाओं और पदार्थों के खिलाफ लड़ाई को सफल बनाने के लिए, उत्तरी क्षेत्र में नशीले पदार्थों के खतरे से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए, आंकड़ों और सूचनाओं के आदान-प्रदान हेतु पंचकूला में एक अंतरराज्यीय नशीली दवाओं पदार्थों को नियंत्रित करने के लिए सचिवालय पहले ही स्थापित किया जा चुका है। इसके बावजूद नशा तस्कर नए-नए तरीके अपनाकर हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को चकमा देने में सफल हो जाते हैं।
पेन किलर के इंजेक्शन, स्मैक, हैरोइन, गांजा, पारा, कूल लिप, नशीली गोलियों के कैप्सूल आदि कई तरह के नशे का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। पुलिस साल दर साल नशीले पदार्थों की भारी मात्रा जब्त करती है, उन्हें नष्ट करती है। नशा मुक्ति केंद्रों के माध्यम से लोगों को सामान्य जीवन जीने के लिए तैयार किया जाता है, लेकिन नशा तस्कर पुलिस और सरकार के इस प्रयास को विफल कर देते हैं। पारंपरिक प्राकृतिक नशीले पदार्थों जैसे अफीम और गांजा से आगे बढ़कर नशेड़ी अक्सर ट्रामडोल, टैपेंटाडोल और अन्य गोलियों को पीसकर इंजेक्शन के जरिये ले रहे हैं। राज्य सरकार नशा मुक्ति का प्रयास अपने स्तर से कर रही है, लेकिन लोगों को भी इस मामले में जागरूक होना पड़ेगा।

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