Wednesday, June 17, 2026

हरियाणा में साढ़े तीन लाख लोग अकेले रहने को अभिशप्त


अशोक मिश्र

अकेलापन महसूस करना और अकेले रहना, दोनों अगल-अलग बाते हैं। कई लोग भरे पूरे परिवार में रहते हैं, हंसते-बोलते, बतियाते हैं, लेकिन मन से वह कुछ समय के लिए ही सही अपने को अकेला महसूस करते हैं। ऐसा तब होता है, जब व्यक्ति का अपने परिवार से जुड़ाव कम होता है। वह अपने परिवार के प्रति आत्मीय नहीं रह जाता है। वहीं, बहुत सारे लोग ऐसे भी होते हैं, जो किन्हीं परिस्थितियों के कारण अकेले रह जाते हैं। हरियाणा में 3.54 लाख से अधिक लोग अकेले रह रहे हैं। 

अकेले रहने वाले इन नागरिकों की पहचान के लिए सत्यापन अभियान चलाया गया है। इस अभियान के माध्यम से उनकी पात्रता और आय से संबंधित आंकड़े इकट्ठे किए जा रहे हैं। परिवार पहचान पत्र में 354215 लोगों ने अपने को अकेला दर्शाया है। इनमें से 1,90,112 लोगों की सालाना आय 1.80 लाख रुपये से कम दिखाई गई है। अब तक 1,66,240 एकल व्यक्तियों का बीपीएल श्रेणी में सफलतापूर्वक सत्यापन किया जा चुका है। बाकी बचे लाभार्थियों का सत्यापन कार्य जारी है। वैसे तो इस सत्यापन का वास्तविक उद्देश्य यही बताया गया है कि सत्यापन के माध्यम से पात्र व्यक्तियों तक सरकारी सुविधाओं को पहुंचाया जाए। 

समय समय पर सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाया जाए, ताकि अकेले रहने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। समाज में सबसे ज्यादा परेशानी का सामना अकेले रहने वाले लोग ही करते हैं। पत्नी या पति की मौत हो जाने, तलाक लेने या दूसरे कारणों से अकेले रहने वालों के सामने कई तरह की दिक्कतें आती हैं। पति या पत्नी की मौत हो चुकी है, अवस्था भी ढल रही है। निस्संतान हैं या संतान की शादी हो चुकी है और वह दूसरे शहर या देश में रह रहा है। 

ऐसी स्थिति में यदि अकेले रहने वाले व्यक्ति के साथ कुछ अघटित घटता है, तो उसकी सहायता करने वाला कोई नहीं होता है। कई बार ऐसी भी घटनाएं सामने आई हैं कि अकेले रहने वाले की किन्हीं परिस्थितियों में मौत हो गई। पड़ोसियों को तब पता चला,जब उसकी लाश से बदबू उठने लगी। बुढ़ापे में अकेले रहना कितना कष्टकारक है, यह वही जान सकता है जो अकेला रहने को अभिशप्त है। बीमारी के दौरान उसकी मदद करने वाला कोई नहीं होता है। 

कई तरह की बीमारियों से जूझता व्यक्ति ऐसी अवस्था में किससे मदद मांगने जाए। लोग अकेले व्यक्ति को देखते ही मुंह फेर लेते हैं कि कहीं ऐसा न हो, मेडिकल स्टोर से दवा लाने को कह दे। या बाजार से सब्जी अथवा खाने-पीने का सामान लाने को कह दे। कई बार तो बेटा-बेटी, बहू अपने परिवार के बुजुर्ग को अकेले रहने को ही बाध्य कर देते हैं। वह यह नहीं सोचते हैं कि एक दिन वह भी बुजुर्ग होंगे और उनके बच्चों ने उन्हें घर से निकाल दिया, तो वह क्या करेंगे।

No comments:

Post a Comment