Tuesday, June 9, 2026

अगर घातक बीमारियों से बचना है तो शारीरिक श्रम करना होगा


अशोक मिश्र

हमारे देश में स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन माना गया है। कहा भी गया है कि तंदुरुस्ती हजार नियामत है। अच्छा स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है। लोग इस कहावत पर अमल भी करते थे। गांवों में ज्यादातर लोग किसान हैं। वह दिन भर अपने खेत-खलिहान में हाड़तोड़ मेहनत करते थे। जमकर खाते-पीते थे और भरपूर नींद लेते थे। यह दिनचर्या उन्हें स्वस्थ रखती थी। घर में खाने-पीने की चीजें भी भरपूर मात्रा में हुआ करती थीं। 

हर घर में गाय-भैंस जरूर हुआ करती थी। इस वजह से दूध, दही और छाछ की भी कमी नहीं थी। इस मामले में हरियाणा कभी देश में अव्वल हुआ करता था। शहरों में भी लोग खूब परिश्रम करते थे। यही वजह है कि उन दिनों लोगों को ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्राल जैसी समस्याएं नहीं हुआ करती थीं। गांव हो या शहर, लोग पैदल चलने को ही प्राथमिकता दिया करते थे। अगर दूरी ज्यादा हुई, तो साइकिल से आया-जाया करते थे। बैलगाड़ी, तांगा और बस आदि भी आवागमन के साधन हुआ करते थे। लेकिन आज हालात ऐसे हो गए हैं कि हरियाणा सरकार को साइकिल ऑन संडे जैसे कार्यक्रम का आगाज करना पड़ रहा है। 

लोगों को प्रेरित करना पड़ रहा है कि रविवार को साइकिल से आना-जाना चाहिए। इससे स्वास्थ्य ठीक रहता है और कई तरह की बीमारियों से निजात भी मिलती है। राज्य के विभिन्न शहरों फरीदाबाद, पलवल और चंडीगढ़ आदि में हर रविवार साइकिल रैलियों का आयोजन किया जाता है, जिनमें हजारों युवा और छात्र भाग लेते हैं। केवल कुछ घंटे साइकिल चलाने से भी कुछ नहीं होने वाला है। 

हमें सातों दिन साइकिल का उपयोग करना होगा। चार-पांच किमी की दूरी तक नियमित साइकिल चलाई जाए, तो स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। भारत सरकार ने 29 अगस्त 2019 को राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर एक फिट इंडिया मूवमेंट शुरू किया था। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शारीरिक गतिविधियों और खेलों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर नागरिकों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके बावजूद लोग स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही बरतने से बाज नहीं आ रहे हैं। 

हरियाणावासियों के स्वास्थ्य के प्रति उदासीन होने का मुख्य कारण तेज शहरीकरण, औद्योगिक विकास के कारण बदलती जीवन शैली, कार्यस्थलों पर बढ़ता तनाव और खानपान में हुए नकारात्मक बदलाव हैं। इसके अलावा जागरूकता की कमी, समय का अभाव और स्वास्थ्य सेवाओं तक भौगोलिक पहुंच में असमानता भी इसमें प्रमुख भूमिका निभाते हैं। 

जब से देश और प्रदेश में सोशल मीडिया का चलन शुरू हुआ है, लोग घर से बाहर निकलकर टहलने से ज्यादा बेहतर आॅन स्क्रीन रहना पसंद करते हैं। शारीरिक श्रम न करने की वजह से लोग कई असाध्य रोगों के शिकार होते जा रहे हैं।

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