अशोक मिश्रमंगलवार को पलवल में अलग-अलग सड़क हादसों में चार युवकों सहित पांच लोगों की मौत हो गई। इन हादसों का कारण वाहन को तेज रफ्तार से चलाना था। हरियाणा में ऐसे हादसे आए दिन होते रहते हैं। तेज रफ्तार वाहन चलाने वाले चालक इस बात की बिल्कुल परवाह नहीं करते हैं कि वह अपने साथ-साथ सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों की भी जान जोखिम में डाल रहे हैं।
तेज रफ्तार वाहन चलाने का आनंद लेने वाले अगर ऐसा सोच लें, तो शायद प्रदेश क्या पूरे देश में होने वाले सड़क हादसों की संख्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। तेज रफ्तार से चल रहा वाहन जब किसी दूसरे वाहन से टकराता है, तो चोट दोनों को लगती है और नुकसान दोनों को होता है। जो चालक ट्रैफिक नियमों का पालन करते हुए अपने गंतव्य की ओर जा रहा था, उसकी क्या गलती थी जिसकी सजा उसे भुगतनी पड़ी। गलती तो उस वाहन चालक की थी जो ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करते हुए तेज गति से वाहन चला रहा था। हरियाणा सरकार और ट्रैफिक पुलिस विभिन्न माध्यमों से आए दिन लोगों को जागरूक करती रहती है कि वह सड़क पर चलते समय ट्रैफिक नियमों का पालन करें।
वाहन को निर्धारित गति सीमा में ही चलाएं। सड़क पर बने संकेतकों को ध्यान में रखें, उसके अनुसार वाहन संचालित करें, लेकिन लोग ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करते हैं और अपने साथ-साथ दूसरों की जान को संकट में डालते हैं। अक्सर देखने में आता है कि लंबी दूरी तक सफर करने वाले वाहन ज्यादातर हादसे का शिकार होते हैं। लंबी दूरी के वाहन चालकों के लिए सबसे बड़ा खतरा थकान और नींद है। बस और ट्रक चालक कई बार लगातार घंटों तक वाहन चलाते रहते हैं।
वह चाहते हैं कि थोड़ा रुक कर कहीं विश्राम कर लें, लेकिन समय पर माल या सवारियों को पहुंचाने की जिम्मेदारी उन्हें विश्राम नहीं लेने देती है। ऐसी स्थिति में पर्याप्त विश्राम नहीं मिलने पर उनकी एकाग्रता कम हो जाती है। ऐसे में चूक होने की आशंका काफी बढ़ जाती है। कई बार तो कुछ सेकंड की झपकी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन जाती है। यह देखने में आया है कि ज्यादातर हादसे रात या सुबह होते हैं। ऐसे समय को विशेष रूप से जोखिम भरा माना जाता है। यह वह समय होता है, जब शरीर स्वाभाविक रूप से विश्राम चाहता है। यदि चालक को विश्राम न मिले, तो चालक को नींद आने की आशंका काफी बढ़ जाती है।
निजी परिवहन कंपनियों, सरकारी परिवहन संस्थाओं और वाहन मालिकों की यह सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि वे अपने वाहन चालकों के कार्य के घंटों को नियंत्रित करें, उन्हें आराम करने का पर्याप्त अवसर दें। उन्हें इंसान समझें, रोबोट नहीं। केवल आर्थिक लाभ के लिए लगातार वाहन चलवाना मानव जीवन के साथ खिलवाड़ है।
No comments:
Post a Comment