Tuesday, July 14, 2026

पर्वतीय क्षेत्रों में होने वाली भारी बारिश हरियाणा के लिए मुसीबत

अशोक मिश्र

देशवासियों को इस बार मानसून ने ठेंगा दिखा दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक अंतरिक्ष से लिए गए चित्र में उत्तर भारत से बादल गायब दिख रहे हैं। आशंका व्यक्त की गई है कि अगले एक सप्ताह तक उत्तर भारत में बरसात के आसार नहीं हैं। वहीं पर्वतीय इलाकों में न केवल भारी बारिश हो रही है, बल्कि बादल भी फट रहे हैं। इसकी वजह से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सहित पूर्वोत्तर राज्यों में भारी नुकसान हो रहा है। पर्वतीय राज्यों में भारी बरसात होने का खामियाजा हरियाणा जैसे राज्यों को भी भुगतना पड़ रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बरसात होने की वजह से हथनी कुंड बैराज से शुक्रवार को पचास हजार क्यूसेक पानी को छोड़ना पड़ा है। इसके चलते हरियाणा के कई जिलों में जलजमाव गया है। 

यमुना का पानी हथनीकुंड बैराज से छोड़े जाने के बाद पानीपत, सोनीपत और फरीदाबाद के निचले इलाकों में घुस जाता है। घग्गर हर बार सिरसा और फतेहाबाद में तबाही मचाता है। कारण सबको पता है। तटबंध कमजोर हैं, जल निकासी के नाले भरे पड़े हैं, अतिक्रमण के कारण नदियों का प्राकृतिक बहाव रुका हुआ है और ड्रेनेज सिस्टम बरसात से पहले साफ नहीं हुए। हरियाणा में भारी बारिश और पहाड़ों से आने वाले पानी के कारण घग्गर, यमुना, मारकंडा और टांगरी जैसी नदियां उफान पर हैं। 

नदियों का बढ़ता जलस्तर कई इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा कर रहा है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। यमुना, घग्गर, मार्कंडा और टांगरी का पानी जब उफान पर आता है तो साथ में लाता है बाढ़, टूटे तटबंध, डूबे खेत और उजड़े घर। नदियों के उफान पर आने से भारी नुकसान होता है। इस लापरवाही की सबसे भारी कीमत आम आदमी चुकाता है। किसान का खेत पानी में डूब जाता है। साल भर की मेहनत एक रात में बह जाती है। मजदूर का घर गिर जाता है। 

बच्चों की पढ़ाई रुक जाती है। बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।  ऐसा हो जाने के बाद प्रशासन फाइलें खोलता है, अधिकारियों-कर्मचारियों की मीटिंगें होती हैं, राहत पैकेज का ऐलान होता है, पर जमीन पर तैयारियां अक्सर आधी अधूरी ही रह जाती हैं। इस बार भी तस्वीर कुछ अलग नहीं है। हरियाणा के नदी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह एक बहुत बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि हर साल बारिश के मौसम में उन्हें इस खतरे का सामना करना पड़ता है। वैसे तो नदियां हमेशा से जीवनदायिनी रही हैं। 

अगर उनके स्वाभाविक प्रवाह को बाधित न किया जाए, तो वह हमेशा मानव के लिए फायदेमंद रही हैं। लेकिन विकास के नाम पर लोगों ने नदियों के डूब क्षेत्र में पूरी बस्तियां बसा ली है। ऐसी स्थिति में जब नदियां उफान पर आती हैं, तो वह सब कुछ बहा ले जाने पर आमादा हो जाती हैं। हमें इस बात को समझना होगा, तभी नदियों के प्रकोप से बचा जा सकता है।

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