Tuesday, July 14, 2026

जब जरूरत हो, तभी करें किसी की मदद

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

बिना संघर्ष किए यदि किसी को कुछ प्राप्त होता है, तो वह उसके लिए उपयोगी साबित नहीं होता हैै। कुछ लोग दयावश उस जीव की भी मदद करने को तैयार रहते हैं जिसको सचमुच किसी मदद की आवश्यकता नहीं होती है। ऐसे लोगों की यह दया भावना दूसरे व्यक्ति के लिए घातक सिद्ध होती है। सच कहा जाए, तो ऐसे लोगों का उद्देश्य बड़ा पवित्र होता है, लेकिन उसके परिणाम जरूर घातक होते हैं। 

एक बार की बात है। किसी गांव में एक व्यक्ति रहता था। वह स्वभाव से बड़ा दयालु था। वह हर किसी की मदद करने को तत्पर रहता था। कई बार तो वह ऐसे लोगों की मदद करने के लिए पहुंच जाता था जिसे किसी प्रकार की मदद की आवश्यकता नहीं होती थी। वह अपने घर के पास बने बगीचे में अक्सर जाया करता था। एक दिन उसने देखा कि बगीचे में तितली का कोकून पड़ा हुआ है। 

वह आदमी अब रोज जब बगीचे में जाता, वह उस कोकून को जरूर देखता था। एक दिन उसने देखा कि कोकून में हलका सा छेद हो गया है। कोकून के भीतर तितली बाहर आने के लिए बहुत संघर्ष कर रही है। वह कई घंटों तक बैठकर देखता रहा। आखिर में तितली थक हारकर बैठ गई। उस आदमी को तितली पर दया आई। उसने घर से कैंची लाकर उस छेद को काटकर बड़ा कर दिया। 

अब तितली तो बारह जरूर आई, लेकिन उसका सारा शरीर सूजा हुआ था। उसके पंख शरीर से चिपके हुए थे। जब तक वह तितली जिंदा रही, घिसट-घिसट कर चलती रही। वो आदमी अपनी दया और जल्दबाजी में ये नहीं समझ पाया की दरअसल कोकून से निकलने की प्रक्रिया को प्रकृति ने इतना कठिन इसलिए बनाया है ताकि ऐसा करने से तितली के शरीर में मौजूद तरल उसके पंखों में पहुंच सके और वो छेद से बाहर निकलते ही उड़ सके।

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