अशोक मिश्र
देश में सबसे कम वन आवरण प्रतिशत वाले राज्यों में हरियाणा का नाम सबसे पहले आता है। राष्ट्रीय वन नीति के मुताबिक वन क्षेत्र का प्रतिशत का लक्ष्य प्रत्येक राज्य के लिए 20 प्रतिशत तय किया गया है। हरियाणा का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 44,212 वर्ग किमी है। हरियाणा का कुल वन क्षेत्र 1,614.26 वर्ग किमी है, जो इसके कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 3.65 प्रतिशत है। इस हिसाब से देखें तो राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार हरियाणा में वन क्षेत्र 16 प्रतिशत से अधिक कम है। भारत राज्य वन रिपोर्ट 2023 का आंकड़ा बताता है कि राज्य में 2019 से 2023 के बीच केवल 12.26 वर्ग किमी की मामूली वृद्धि हुई है।इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए सैनी सरकार ने पर्यावरण संतुलन और जलवायु अनुकूलन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिपूरक वनीकरण प्रबंधन और योजना प्राधिकरण के तहत 298.43 करोड़ रुपये वार्षिक कार्य योजना को मंजूरी दी है। योजना के मुताबिक, प्रदेश में 1882 हेक्टेयर में बीस लाख से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। इतना ही नहीं, प्रदेश में 4518 हेक्टेयर भूमि पर पहले से रोपे गए पौधों का संरक्षण और रखरखाव किया जाएगा। यह पौधे विभिन्न कार्यक्रमों और अवसरों पर रोपे गए थे।
सरकार की यह योजना प्रदेश में पहले से रोपे गए पौधों के संरक्षण के साथ ही साथ लोगों को पौधरोपण की ओर आकर्षित करना है। सरकारी स्तर पर सहायता और सुविधा मिलने पर आम नागरिक भी पौधरोपण और वनीकरण में रुचि लेने लगेंगे। इससे न केवल वन क्षेत्र में वृद्धि होगी, बल्कि जलवायु परिवर्तन पर भी रोक लग सकेगी। हरियाणा में तीन प्रकार के वनक्षेत्र पाए जाते हैं जिनमें आरक्षित वन क्षेत्र 24,962.98 हेक्टेयर, संरक्षित वन 1,20,282.08 हेक्टेयर और अवगीर्कृत वन क्षेत्र 1,292.62 हेक्टेयर है। सबसे अधिक वन क्षेत्र पंचकूला जिला (390.12 वर्ग किमी) और सबसे कम वन क्षेत्र पलवल जिले (13.82 वर्ग किमी) पाया गया है।
हरियाणा में निर्दिष्ट वनों के बाहर लगभग 4.1 करोड़ पेड़ हैं जिनमें नीम, शीशम, पीपल, बरगद और नीलगिरी सबसे सामान्य प्रजातियां हैं। राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार बीस प्रतिशत वन क्षेत्र का लक्ष्य हासिल करने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है। सबसे पहले तो अरावली और शिवालिक की पहाड़ियों पर होने वाले अवैध खनन और पेड़-पौधों की कटाई पर अंकुश लगाना होगा।
इसके साथ ही साथ एक अभियान चलाकर पौधरोपण करना होगा। इसमें सरकारी विभागों के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों और स्कूल-कालेजों की भागीदारी भी सुनिश्चित करनी होगी। पौधरोपण के बाद पौधों की देख रेख और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी उठानी होगी, तभी वन क्षेत्र में वृद्धि का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। पर्यावरण को बचाने का यही एक मात्र तरीका है जिस पर काम करके जलवायु परिवर्तन पर रोक लगाई जा सकती है।

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