Wednesday, July 15, 2026

बरसात के दिनों में जल निकासी बन जाती है सबसे बड़ी समस्या


अशोक मिश्र

हरियाणा में बरसात ने सरकारी व्यवस्था की पोल खोल दी है। कई जिलों में सड़कों और गलियों में जलभराव ने लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। गुरुग्राम की सड़कें हों या मेवात, पलवल, फरीदाबाद के निचले इलाके, रोहतक और हिसार के कई गांव, हर जगह पानी भरना अब आम बात हो गई है। हरियाणा की भौगोलिक बनावट के कारण रोहतक, झज्जर और सोनीपत जैसे मध्यवर्ती इलाकों में प्राकृतिक जल निकासी की समस्या है, जिससे हर मानसून में निचले इलाकों में पानी भर जाता है। 

कुछ घंटे की बारिश भी कई इलाकों को घंटों के लिए तालाब में बदल देती है और इसके बाद शुरू होता है बीमारियों और दिक्कतों का सिलसिला।ग्रामीण इलाकों की दशा तो बरसात के दिनों में और भी खराब हो जाती है। खेतों में लंबा जलभराव होने से किसानों की खड़ी फसलें नष्ट हो जाती हैं और मिट्टी की गुणवत्ता खराब होती है। कई जिलों में कई बार पानी कई दिनों तक जमा रहता है। इस रुके हुए पानी में एडीज और एनोफिलिज मच्छरों के पनपने लगते हैं जिसकी वजह से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है। बरसात के मौसम में सबसे बड़ी परेशानी पानी का दूषित हो जाना है। 

पीने वाले पानी में सीवर की गंदगी मिलने से पीलिया, टाइफाइड, हैजा और गैस्ट्रोएंटेराइटिस (पेट में संक्रमण और उल्टी-दस्त) जैसी बीमारियां होती हैं। दूषित पानी के संपर्कमें लंबे समय तक रहने से त्वचा पर चकत्ते, फंगल इंफेक्शन और आंखों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। अस्पतालों में ऐसे रोगियों की भरमार हो जाती है। सड़कों पर पानी भरने से लंबा ट्रैफिक जाम लगता है। भारी बरसात होने की वजह से कई बार सड़कें तक धंस जाती हैं। ऐसी स्थिति में सड़क दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। 

जल जमाव सिर्फ बीमारी ही नहीं लाता, रोजमर्रा की जिंदगी भी ठप कर देता है। स्कूल जाने वाले बच्चे कीचड़ और पानी से होकर गुजरते हैं। कई बार सड़कें बंद होने से बसें नहीं चलतीं और विद्यार्थियों की पढ़ाई छूट जाती है। दफ्तर जाने वाले लोग घंटों जाम में फंस रहते हैं। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे औद्योगिक इलाकों में पानी भरने से फैक्टरियों में काम रुक जाता है, जिससे मजदूरों की दिहाड़ी भी जाती है। इस समस्या की जड़ में अव्यवस्थित शहरीकरण, नालों की सफाई न होना और जल निकासी की सही योजना का अभाव है। कई जगह नाले अतिक्रमण के कारण बंद हैं। कचरा डालने से वे जाम हो गए हैं। 

बारिश का पानी जमीन में नहीं जा पाता क्योंकि कंक्रीट के जंगल बढ़ गए हैं। समाधान के लिए सिर्फ  बरसात के बाद सफाई काफी नहीं है। हर जिले में बरसात से पहले नालों की सफाई, अतिक्रमण हटाना और पंपिंग स्टेशन दुरुस्त करने की मुहिम चलनी चाहिए। शहरी इलाकों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किया जाए ताकि पानी जमीन में जाए। 

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