Saturday, September 5, 2026

सबको आत्मसुधार का है अधिकार

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

महात्मा बुद्ध और उनका परम प्रिय शिष्य आनंद एक जगह पर वार्तालाप कर रहे थे। आनंद ने कहा, आर्य श्रेष्ठ! श्रावस्ती परंपरावादियों का गढ़ है। वहां जाने की अपेक्षा राजगृह जाना ज्यादा उचित होगा क्योंकि राजगृह में संघ का विस्तार हो रहा है, लेकिन श्रावस्ती में तो अभी संघ की नींव ही पड़ी है। आनंद की बात सुनकर महात्मा बुद्ध मुस्कुराए और बोले, आनंद! बिना संघर्ष किए कुछ भी उपलब्धि हासिल नहीं की जा सकती है। 

धर्म का प्रचार करना है, तो संघर्ष करना ही होगा। इसलिए श्रावस्ती जाना उचित होगा। जब लोगों को यह समाचार मिला कि तथागत श्रावस्ती आ रहे हैं, तो लोगों से उत्साह का संचार हुआ। उधर, महात्मा महात्मा बुद्ध  के विरोधियों ने भी अश्वलायन के नेतृत्व में अपना मोर्चा जमा लिया। 

नियत समय पर अश्वलायन अपने साथियों के साथ महात्मा महात्मा बुद्ध  के समक्ष प्रस्तुत हुआ और भर्त्सना करते हुए कहा कि तात! आप चारों वर्णों के उद्धार की बात करते हैं। क्या ब्राह्मणों के अलावा किसी को धर्म दीक्षा देने का अधिकार है? तथागत ने स्नेहपूर्वक कहा कि तात! ब्राह्मणों की श्रेष्ठता का आधार क्या है? 

अश्वलायन ने कहा कि ब्राह्मणों का ज्ञान, तप, निर्लोभ निरहंकारिता, साधना और ब्रह्मवर्चस ही उनकी श्रेष्ठता का आधार है। महात्मा बुद्ध ने फिर कहा, क्या ब्राह्मण चोरी नहीं करते, क्या ब्राह्मण झूठ नहीं बोलते। ब्राह्मण अगर नीच कार्य करेगा, तो क्या वह पापी नहीं माना जाएगा। श्रेष्ठ वही है जिसका मन निर्मल है। भले ही वह किसी भी वर्ण में पैदा हुआ हो। अब अश्वलायन के पास महात्मा बुद्ध की बात का कोई जवाब नहीं था। अश्वलायन ने बुद्ध के मत को स्वीकार कर लिया। बाद में वह धर्म चक्र प्रवर्तन कार्य में बहुत अधिक सहायक साबित हुआ।

जागरूक नागरिक रोक सकते हैं हरियाणा में फैला ड्रग्स कारोबार

अशोक मिश्र

हरियाणा की पहचान दूध-दही युक्त पौष्टिक भोजन और भारतीय सेना में अधिक से अधिक जवानों को भेजने वाले प्रांत के रूप में रही है। हरियाणा को सदियों पुरानी अपनी सभ्यता और संस्कृति पर हमेशा गर्व रहा है। सिंधु घाटी सभ्यता और वैदिक सभ्यता से जुड़ाव का सौभाग्य देश के कम राज्यों को मिला है। हरियाणा को अपनी इस उपलब्धि पर हमेशा गर्व रहा है। लेकिन पिछले कुछ दशकों से हरियाणा में नशीले पदार्थों का चलन बढ़ता जा रहा है। प्रदेश खामोश नशे की चपेट में है और इस चपेट का सबसे तीखा सिरा दिल्ली से सटा फरीदाबाद बन चुका है। फरीदाबाद का हॉटस्पॉट बनना कोई संयोग नहीं है। 

यह भूगोल और अर्थशास्त्र दोनों का परिणाम है। 135 किमी लंबा कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे अपने दस इंटरचेंज के साथ तस्करों के लिए खुला कॉरिडोर बन गया है, जहाँ से माल आसानी से गुरुग्राम, पलवल और दिल्ली में उतर जाता है। हरियाणा स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश में एक ही तरह का नशा नहीं है बल्कि एक पूरा बाजार है। एक तरफ पंजाब से सटा बार्डर और दिल्ली का नाइटलाइफ कल्चर सस्ती आपूर्ति बनाता है, दूसरी तरफ मांग के पीछे गहरी सामाजिक दरार है। 

हरियाणा में खेती का संकट, जमीन बंटती जा रही है, सरकारी नौकरी की दौड़ में लाखों युवा सालों तक कोचिंग में अटके हैं, और फरीदाबाद-गुरुग्राम के फैक्ट्री-मजदूरों और डिलीवरी ब्वॉय की अनिश्चित जिंदगी में थकान और अकेलेपन को सुन्न करने का सबसे सस्ता तरीका एक पुड़िया लगती है। आर्थिक रूप से यह कारोबार आसान मुनाफे का स्रोत बन गया है क्योंकि बेरोजगार युवा तस्करी या फुटकर बिक्री में लग जाते हैं। सामाजिक रूप से जातिगत प्रभाव, परिवारों का टूटना और खप पंचायतों की सीमित पहुंच ने समस्या को और गहरा दिया है। 

पुलिस और प्रशासन ने हरियाणा स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के माध्यम से कड़ी कार्रवाई शुरू की है। एनडीपीएस एक्ट के तहत बड़े पैमाने पर मामले दर्ज किए जा रहे हैं, व्यावसायिक मात्रा की जब्ती पर जोर दिया जा रहा है, अंतर्राज्यीय नेटवर्क तोड़े जा रहे हैं और पीआईटी-एनडीपीएस के तहत आदतन अपराधियों को हिरासत में लिया जा रहा है। संपत्तियों की कुर्की और ध्वस्तीकरण के साथ-साथ जागरूकता अभियान, खेल आयोजन और नशा मुक्त गांव घोषित करने के प्रयास चल रहे हैं। 

हरियाणवी संस्कृति जो कभी सामूहिक श्रम और फौजी अनुशासन पर टिकी थी, वह अब तात्कालिक नशे के आराम और दिखावटी हाई-प्रोफाइल लाइफस्टाइल की नकल में उलझ गई है। बेरोजगारी, कृषि संकट, युवाओं में निराशा और विदेश जाने की असफल कोशिशें नशे की ओर धकेल रही हैं। यह समस्या केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं सुलझेगी। रोजगार सृजन, शिक्षा सुधार, परिवारों की भागीदारी और दीर्घकालिक पुनर्वास बिना यह संकट गहराता रहेगा। 

Friday, September 4, 2026

वक्कलि! यह सब कुछ क्षणभंगुर है

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

श्रावस्ती में वक्कलि नाम का ब्राह्मण रहता था। कहने को तो वह ब्राह्मण था, लेकिन गुण, कर्म और स्वभाव में ऐसी कोई बात नहीं थी जिससे उसका ब्राह्मणत्व झलकता हो। उसके मन मस्तिष्क में हमें रूप, यौवन और धन संबंधी बातें ही आती रहती थीं। उन्हीं दिनों श्रावस्ती के वेलुवन में महात्मा बुद्ध पधारे। वेलुवन में एक विशाल धर्म सभा का आयोजन किया गया। जिसने भी सुना कि श्रावस्ती में तथागत आए हुए हैं, वह उनके दर्शन को दौड़ा चला गया। 

धर्म सभा में अपार भीड़ उमड़ती थी। लेकिन तथागत की वाणी को सुनने के लिए वक्कलि नहीं गया। एक दिन उसके गांव के एक व्यक्ति ने उससे धर्म सभा में महात्मा बुद्ध का प्रवचन सुनने के लिए चलने को कहा, तो वह बेमन से धर्म सभा में चला गया। महात्मा बुद्ध को देखते ही वह अचंभित रह गया। उसने अपने मन में कहा कि यही तो है जिसे वह खोज रहा था। 

वक्कलि ने उसी दिन महात्मा बुद्ध से बौद्ध धर्म की दीक्षा ग्रहण की। महात्मा बुद्ध ने उसे दीक्षा तो दे दी, लेकिन वह समझ गए कि इसकी मनस्थिति धर्म की दीक्षा लेने लायक नही है। एक दिन वक्कलि ने तथागत से कहा कि भगवन! आप मुझे योगसाधना सिखाएं जिससे मैं भी आपकी तरह रूपवान हो जाऊं। आप जैसी ओजस्विता मुझ में भी आ जाए। आप जैसा नवयौवन मुझ में भी फूट पड़े। 

बुद्ध ने कहा कि रूपवान होने के लिए उपाय किए जा सकते हैं, शरीर को मजबूत करने के लिए योगासान सिखाया जा सकता है। लेकिन वक्कलि यह सब कुछ क्षणभंगुर है। एक दिन मिट जाएगा। आत्मोत्सर्ग का स्थायी साधन तो धर्म धारण है। वक्कलि को अपनी भूल का पता चल गया। उसने उसी दिन से आत्म सुधार और आत्म निरीक्षण की ओर ध्यान देना शुरू किया और एक दिन महान भिक्षु बन गया।

सड़कों पर डिवाइडर तोड़कर बनाए गए अवैध कट साबित हो रहे जानलेवा


अशोक मिश्र

हरियाणा की सड़कों पर लगे अवैध कट हादसों का प्रमुख कारण बनते जा रहे हैं। प्रदेश में जितनी सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, उनमें से लगभग आधी दुर्घटनाएं इन अवैध कटों के कारण होती हैं, लेकिन सरकारी रिकार्ड में यह कहीं दर्ज नहीं की जाती हैं। स्टेट हाईवे, एक्सप्रेसवे, नेशनल हाईवे, डिस्ट्रिक्ट रोड्स और शहरों की सड़कों पर जगह-जगह बने अवैध कट तेज रफ्तार से दौड़ते वाहनों के लिए अचानक खतरा पैदा कर रहे हैं। ये कट होटल, ढाबों, पेट्रोल पंपों, गोदामों या स्थानीय लोगों द्वारा सुविधा के नाम पर बनाए जाते हैं। 

नतीजा यह होता है कि आने वाली गाड़ियां अचानक सामने आने वाले वाहनों या पैदल यात्रियों से टकरा जाती हैं। पूरे प्रदेश में सड़क हादसों से सालाना लगभग ढाई हजार से तीन हजार से अधिक मौतें हो रही हैं। 2023 में करीब पांच हजार, 2024 में सवा अड़तालीस सौ और 2025 में तीन हजार से अधिक मौतें दर्ज हुईं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा अवैध कट, अनधिकृत एंट्री-एग्जिट और मेडियन तोड़ने से जुड़ा है। ये मौतें सिर्फ आंकड़े नहीं बल्कि उन परिवारों की कहानियां हैं जिनके कमाने वाले अचानक चले गए या अपंग हो गए। 

औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूर पैदल हाईवे पार करते हुए या अनधिकृत कट से निकलते हुए अक्सर शिकार बन जाते हैं। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया और राज्य के विभिन्न विभाग अवैध कट बंद करने के अभियान चलाते रहे हैं। पानीपत-अंबाला स्ट्रेच पर चार सौ से अधिक अनधिकृत कट बंद किए गए। गुरुग्राम में दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर दर्जनों कट बंद किए गए। करनाल में ढाबा और पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुईं। कई जगहों पर क्रैश बैरियर, थ्री बीम बैरियर, रेलिंग और फेंसिंग लगाई गई। 

ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए और कुछ जगहों पर फुट ओवर ब्रिज या उचित एंट्री-एग्जिट पॉइंट बनाने की योजनाएं बनीं। यातायात पुलिस ने चेतावनी दी कि अवैध कट से हादसा होने पर एनएचएआई अधिकारियों पर भी केस दर्ज हो सकता है। कुछ जिलों में हादसों की संख्या में मामूली कमी भी आई है जहां इंजीनियरिंग सुधार और पेट्रोलिंग बढ़ाई गई। हरियाणा पुलिस ने माना है कि ढाबों, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के पास बनाए गए अनधिकृत कट हादसों का बड़ा कारण हैं और एनएचएआई को उन्हें स्थायी रूप से बंद करने और दोबारा बनने पर एफआईआर दर्ज करने को कहा गया है। 

इसके बावजूद लोग सड़कों पर अवैध कट लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। वह अपनी थोड़ी सी सुविधा के लिए सड़क पर चलने वालों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। लोगों का ऐसा करना, जहां कानूनी रूप से गलत है, वहीं इंसानियत के नाते भी गलत है। यह समस्या तब तक खत्म नहीं हो सकती है, जब तक लोग खुद जागरूक नहीं होते हैं। जागरूकता ही बचाव का सबसे सशक्त माध्यम है।

Thursday, September 3, 2026

अपनी धुन के पक्के निकले बोधिसत्व

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

जातक कथाओं में बुद्ध के संबंध में एक कथा कही गई है। कहते हैं कि पूर्ण बुद्ध के पैदा होने से पहले बोधिसत्व ने काशी नरेश ब्रह्मभद्र के यहां कनिष्ठ पुत्र के रूप में हुआ। जब वह बड़े हुए तो उन्हें राजा बनने की इच्छा हुई। काशी में वह बन नहीं सकते थे क्योंकि छोटे पुत्र थे। उन्होंने उस समय के बहुत बड़े तांत्रिक महासिद्ध प्रत्यंग से अपनी कामना पूर्ति का उपाय पूछा, तो महासिद्ध ने बताया कि अगले महीने तक्षशिला का राज सिंहासन खाली होने वाला है। वह जो भी व्यक्ति पूर्णिमा के दिन सुबह राज महल के फाटक पर खड़ा मिलेगा, वही राजा बनेगा। 
अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए वह उसी समय चल पड़े। जानकारी मिलने पर उनके पांच मित्र भी उनके साथ जाने के लिए तैयार हुए। चलते समय महासिद्ध प्रत्यंग ने बताया कि रास्ते में यक्ष वन मिलता है। वहां की यक्षिणियां रूप, रस, गंध, शब्द और स्पर्श से राहगीरों को फुसलाती हैं और उनको भोगती हैं और क्षीण होने पर मारकर खा जाती हैं। 
बोधिसत्व ने चल पड़े। यक्ष वन में एक यक्षिणी ने उनको फुसलाना चाहा, लेकिन वह अपने निश्चय से डिगे नहीं। वह उनके पीछे-पीछे चलती चली आई, लेकिन उनके पांचों मित्र रूपसी यक्षिणियों पर मोहित हो गए और बाद में काल के गाल में समा गए। वह यक्षिणी उनके पीछे-पीछे आती रही। वह मुहूर्त की प्रतीक्षा में एक कुंज में रुक गए। तब तक यक्षिणी की सुंदरता की खबर फैल चुकी थी। 
तक्षशिला के राजा ने यक्षिणी को पटरानी बनाने का आश्वासन देकर विवाह कर लिया। उसने राजमहल में अन्य यक्षिणियों को भी बुला लिया। सबने मिलकर सबका भक्षण कर लिया। नियत समय जब राज महल से बाहर रहने वालों ने फाटक तोड़ना चाहा, तो वहां सबसे पहले बोधिसत्व खड़े दिखे। सबने बोधिसत्व को ही वहां का राजा बना दिया और यक्षिणियों से राज्य को मुक्त कराया। एक दिन बोधिसत्व ने अपनी प्रजा से कहा कि रूप, शब्द, रस, स्पर्श और गंध ही पांच यक्षिणियां हैं। जो विनाश का कारण बनती हैं।

सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं होने के बावजूद खुले में प्रसव शर्मनाक

अशोक मिश्र

हरियाणा के लिए यह काफी संतोष की बात है कि राज्य में संस्थागत प्रसव की दर लगभग 98 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। मातृ मृत्यु अनुपात 89 प्रति लाख जीवित जन्म के आसपास है। यह हरियाणा सरकार की व्यवस्था और संवेदनशीलता का जीता जागता प्रमाण है। सरकार ने महिलाओं की सुरक्षित प्रसूति के लिए कई व्यवस्थाएं की हैं। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव पूरी तरह मुफ्त और नकदरहित है। 

इसमें सामान्य या सिजेरियन प्रसव, दवाएं, जांच, रक्त, आहार और परिवहन की सुविधा शामिल है। घर से अस्पताल, रेफरल और वापसी की मुफ्त एंबुलेंस सेवा भी उपलब्ध है। जननी सुरक्षा योजना गरीब और अनुसूचित जाति की महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए नकद प्रोत्साहन देती है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना पहली जीवित संतान के लिए गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को तीन किस्तों में पांच हजार रुपये देती है। मुख्यमंत्री मातृत्व सहायता योजना दूसरी संतान के लिए भी कुछ श्रेणियों की महिलाओं को सहायता प्रदान करती है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर महीने नौ तारीख को विशेषज्ञ जांच और अल्ट्रासाउंड जैसी सेवाएं दी जाती हैं। 

सुरक्षित मातृत्व आश्वासन पहल सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण देखभाल सुनिश्चित करने पर जोर देती है। इसके बावजूद अफसोस यह है कि राज्य में कई बार महिलाओं को अस्पताल पहुंचने के बाद भी खुले में या गेट पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा है। फरीदाबाद के धौज स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में रविवार रात जो कुछ हुआ, वह किसी एक रात की घटना नहीं है। पूरे राज्य में अक्सर ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। 

रविवार रात साढ़े तीन बजे प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को लेकर परिजन पीएचसी पहुंचे तो गेट पर ताला लटका मिला। मजबूरी में खुले में महिला का प्रसव कराना पड़ा। सिविल सर्जन ने धौज पीएचसी के एसएमओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, लेकिन इससे क्या स्थिति सुधर जाएगी? यह अहम सवाल है। मीडिया रिपोर्टों में फरीदाबाद, झज्जर और करनाल जैसे जिलों में समय-समय पर गेट बंद होने, स्टाफ की कमी या देरी के कारण ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। 

इन घटनाओं से साफ है कि योजनाओं के बावजूद रात के समय आपात द्वार, स्टाफ की उपस्थिति और संचार व्यवस्था में खामियां बनी हुई हैं। गर्भवती महिलाओं को ऐसी स्थिति से बचाने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर रात भर आपात द्वार खुला रखना, स्पष्ट संकेत बोर्ड लगाना, स्टाफ की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करना और नियमित निगरानी जरूरी है। परिवारों को पहले से पता होना चाहिए कि रात में किस द्वार से प्रवेश करना है। गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण, उच्च जोखिम वाले मामलों की पहचान और समय पर रेफरल मजबूत किया जाना चाहिए।

Wednesday, September 2, 2026

इस जैसा प्रेमी आदमी कभी नहीं देखा

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

किसी गांव में जूता सिलने वाला व्यक्ति रहता था। गरीब था। दो जून की रोटी का ठिकाना भी बड़ी मुश्किल से हो पाता था। उस गांव में महात्मा बुद्ध का प्रवचन होना था। लेकिन उसे इन बातों से मतलब भी नहीं था रोजी-रोटी कमाने के चक्कर में। एक दिन वह सुबह सोकर उठा और पास के तालाब में गया, तो उसे एक सुंदर फूल दिखाई दिया। उसने कीचड़ में घुसकर उस फूल को तोड़ा और उसे बेचने के लिए शहर की ओर चल दिया। 

सोचा, आठ आने, एक रुपया मिल जाएगा, तो दो दिन का खर्च चल जाएगा। जैसे ही वह गांव के बाहर पहुंचा, रास्ते में नगर सेठ ने उसके हाथ में फूल देखा, तो कहा कि इस फूल के मैं दो रुपये दूंगा। यह फूल मुझे दे दो। गरीब आदमी खुश हो गया। तभी राजा के एक मंत्री वहां आ पहुंचे और उन्होंने कहा कि मैं इस फूल के पांच रुपये दूंगा। यह फूल मेरा हुआ। 

नगर सेठ और मंत्री में हो रहा विवाद निपटा भी नहीं था कि वहां राजा की सवारी आ पहुंची। राजा ने उस फूल को देखते ही कहा कि यह फूल मेरा हुआ। मैं तुम्हें राजकोष से इतना धन दूंगा कि तुम्हें जीवन भर मेहनत करने की जरूरत नहीं होगी। देखते ही देखते उस फूल की कीमत हजारों रुपये हो गई। अब गरीब व्यक्ति ने राजा से पूछा कि आखिर इस फूल में ऐसी क्या खासियत है जो इतना महंगा हो गया। 

राजा ने सारी बात बताई कि इस गांव में महात्मा बुद्ध का आगमन होने वाला है। हम इसे बुद्ध को भेंट करना चाहते हैं। यह सुनकर उस व्यक्ति ने फूल बेचने से मना कर दिया। शाम को जब बुद्ध गांव में पहुंचे, तो उस व्यक्ति ने बुद्ध को प्रणाम करते हुए उस फूल को अर्पित कर दिया और एक कोने में जाकर खड़ा हो गया। बुद्ध के कानों तक फूल की कथा पहुंच चुकी थी। उन्होंने कहा कि जिस आदमी के पास खाने के पैसे नहीं हैं। वह आदमी इतना बड़ा त्याग कर रहा है। मैं वर्षों से भ्रमण कर रहा हूं, इस जैसा प्रेमी आदमी कभी नहीं मिला।

कभी शुद्ध जल का स्रोत रही यमुना नदी का पानी छूने लायक नहीं रहा

अशोक मिश्र

हरियाणा में यमुना नदी की हालत इन दिनों चिंताजनक है। प्राचीनकाल से लेकर चार-पांच दशक पहले तक यह नदी शुद्ध जल का स्रोत मानी जाती थी। अब यमुना नदी कई स्थानों पर मानक से कहीं अधिक प्रदूषित हो चुकी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने अभी हाल में जो आंकड़े जारी किए हैं, उसके मुताबिक जब हरियाणा में यमुना नदी प्रवेश करती है, तो उसका पानी अपेक्षाकृत साफ होता है। फरीदाबाद और पलवल तक पहुंचने के बाद वह एक गंदे नाले में तब्दील हो जाती है। इन दोनों जिलों में यमुना नदी मानक से 27 गुना ज्यादा प्रदूषित पाई गई है। इसका सबसे बड़ा कारण है सीवेज और औद्योगिक कचरे का बिना उपचार के सीधा नदी में जाना। 

हरियाणा के पास अपने घरेलू गंदे पानी के लगभग 80 प्रतिशत हिस्से को रिसाइकिल करने की क्षमता है, लेकिन हकीकत में राज्य प्रतिदिन कम से कम 1140 एमएलडी अनुपचारित या आंशिक रूप से उपचारित सीवेज यमुना में छोड़ रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यमुना में पहुंचने वाले कुल प्रदूषण का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा अकेला गुरुग्राम छोड़ता है। पानीपत और सोनीपत में हर दिन लगभग 42 मिलियन लीटर अनुपचारित सीवेज नदी में जा रहा है। फरीदाबाद की सैकड़ों अवैध डाइंग और टेक्सटाइल इकाइयां रासायनिक और रंगीन कचरा खुलेआम बुढ़िया नाले में बहा रही हैं। 

बल्लभगढ़-पलवल से भी बिना शोधन का सीवेज गिरता है, इसलिए वजीराबाद से ओखला के बीच 22 किमी का हिस्सा सबसे अधिक प्रदूषित माना ही जाता है। यमुना नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए सरकारी प्रयास कई दशकों से चल रहे हैं, पर कमी कार्यान्वयन में रह गई है। यमुना कार्य योजना के पहले और दूसरे चरण में कुल 1514.42 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। 

तीसरे चरण के लिए 1656 करोड़ रुपये की संशोधित लागत मंजूर की गई है। एनजीटी ने कई बार हरियाणा को एसटीपी अपग्रेड करने की डेडलाइन दी, नालों की निगरानी के लिए विशेष समिति बनवाई और सीपीसीबी को तिमाही आधार पर एसटीपी के प्रदर्शन की निगरानी का निर्देश दिया। 2027 तक नालों के बीओडी स्तर को 10 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम करने का लक्ष्य रखा गया है। ड्रोन सर्वेक्षण से नालों की मैपिंग हो रही है, सीवर लाइनें लगभग पूरी बिछाई जा चुकी हैं और अवैध डिस्चार्ज पर कार्रवाई भी हो रही है। 

कई जगह क्षमता बढ़ी है और कुछ नालों से उपचारित पानी की मात्रा पहले से ज्यादा हो गई है। फिर भी कमी बनी हुई है। नदियों के प्रदूषण का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव गहरा है। यमुना और घग्गर के किनारे की खेती पर असर पड़ रहा है। उच्च टीडीएस और रासायनिक कचरे वाला पानी फसलों और मवेशियों के लिए खतरनाक है, भूजल में भी 30 से 50 प्रतिशत तक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। पीने के पानी में अमोनिया बढ़ने से क्लोरीन के साथ मिलकर कैंसर तक का खतरा बताया गया है।

Tuesday, September 1, 2026

खरगोश बोला, भागो! आकाश फट पड़ा है


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

एक बार किसी शिष्य ने महात्मा बुद्ध से पूछा कि भंते! जब भय पैदा होता है, तो वह सोचने विचारने की क्षमता क्यों हर लेता है? अपने शिष्य की बात सुनकर महात्मा बुद्ध ने उन्हें एक कथा सुनाई। वाराणसी में एक खरगोश रहता था। वह एक दिन अपनी घनी झाड़ियों में सो रहा था। 

कुछ देर पहले ही उसने भरपेट भोजन किया था। नींद में उसने सपना देखा कि वह किसी महल में सोया हुआ है। उस महल की छत टूटकर गिर गई है और वह मलबे में दबता जा रहा है। तभी संयोग से पास में ही लगे बेल के पेड़ से एक फल टूटकर गिरा। गिरने पर बड़ी जोर की आवाज हुई। उसने आकाश की ओर देखा। उसने सोचा कि आकाश फट पड़ा है। वह आत्मरक्षा के लिए भाग खड़ा हुआ। 

रास्ते में उसे हिरनों का एक झुंड मिला। उसने भागने का कारण पूछा, तो भागते-भागते खरगोश ने कहा कि पीछे आकाश फट पड़ा है। मैं सुरक्षित स्थान पर शरण लेने जा रहा हूं। जान बचानी है, तो तुम भी भागो। हिरनों का झुंड भी भागने लगा। इस तरह रास्ते में भेड़, बकरी, गाय जैसे तमाम जानवर मिलते गए और बिना कोई कारण जाने सब भागने लगे। भागते-भागते वह पहाड़ी घाटी में पहुंच गए। 

वहां एक शेर खड़ा हुआ था। उसने उन सबको रोका और पूछा कि तुम लोग भाग क्यों रहे हो? खरगोश ने कहा कि आकाश फट पड़ा है। शेर ने कहा कि ऊपर देखो, आकाश तो वहीं है। सारे जानवरों ने जब ऊपर देखा, तो विश्वास हुआ कि बादल नहीं फटा है। सब खरगोश को कोसते हुए लौट पड़े। यह कथा सुनाकर बुद्ध ने अपने शिष्य से कहा कि जब मन में भय पैदा होता है, तो सोचने-विचारने की शक्ति खत्म हो जाती है। ऐसा ही आध्यात्मिक जगत में भी होता है।

छोटी-छोटी जगहों पर पौधरोपण कर बढ़ाई जा सकती है हरियाली


अशोक मिश्र

फरीदाबाद में हरियाली बढ़ाने और शहरी वन क्षेत्र में वृद्धि करने के लिए डीएनडी-केएमपी (दिल्ली-नोएडा डायरेक्ट फ्लाईवे-कुंडली-मानेसर-पलवल) एक्सप्रेसवे लिंक रोड किनारे पौधे और झाड़ियां उगाई जाएगी, ताकि इन क्षेत्रों में हरियाली आ सके। दरअसल, हरित क्षेत्र बढ़ाने का प्रयास तो पूरे हरियाणा में हो रहा है। इसमें जहां सरकार अपनी ओर से प्रयास कर रही है, वहीं स्वयंसेवी संस्थाओं और स्कूल-कालेजों का भी इसमें बहुत बड़ा योगदान है। राज्य सरकार वन महोत्सव, कैम्पा फंड, ग्रीन इंडिया मिशन, नगर वन योजना और एक पेड़ मां के नाम जैसी पहलों के जरिए करोड़ों पौधे लगाने का लक्ष्य रख रही है। 

हाल ही में एक करोड़ चालीस लाख पौधों का अभियान शुरू किया गया, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों, पंचायत भूमि, सड़कों और नहरों के किनारे रोपण शामिल है। मियावाकी वन और विरासत पेड़ों के संरक्षण जैसी नई पहलें भी हो रही हैं, ताकि शहरों और गांवों में हरियाली बढ़े। सरकारी प्रयासों से वनक्षेत्र बढ़ाने में सफलता सीमित रही है। दो हजार उन्नीस से दो हजार तेईस के बीच करीब एक हजार करोड़ रुपये केंद्रीय फंड मिलने के बावजूद वन आवरण में सिर्फ बारह वर्ग किमी का इजाफा हुआ। 

दस साल की अवधि में भी वृद्धि तीस वर्ग किमी के आसपास ही रही। घने वनों में कमी आई है जबकि खुले वन और स्क्रब लैंड थोड़े बढ़े हैं। कई जिलों में वन आवरण घटा है। पौधे लगाने के बावजूद उनकी जीवित रहने की दर कम रहना और भूमि की उपलब्धता सीमित होना प्रमुख बाधाएं हैं। हाल में सरकार ने रोपण के बाद रखरखाव पर ज्यादा जोर दिया है और बड़े-बड़े पांच हेक्टेयर के टुकड़ों में रोपण की नीति अपनाई है, ताकि निगरानी आसान हो। अरावली इलाके की स्थिति सबसे चिंताजनक है। 

दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में फैली दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक अरावली ही रेगिस्तान को रोकने, भूजल पुनर्भरण और जैव विविधता को बचाने की दीवार है, पर अवैध खनन, फार्महाउसों के लिए जंगल कटाई और शहरीकरण ने इसे खोखला कर दिया है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की एक स्टडी के अनुसार 2001 से 2016 के बीच हरियाणा के अरावली क्षेत्र में वन आवरण में 37 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिसका सीधा संबंध खनन गतिविधियों से है।  

अरावली ग्रीन वॉल जैसी परियोजनाओं से सुधार की उम्मीद है। पहले से ही सड़कों, नहरों और रेलवे लाइनों के किनारे पट्टी वाले वन मौजूद हैं। इन जगहों पर और पौधे लगाकर हरे गलियारे बनाए जा सकते हैं, जो वायु प्रदूषण कम करने और तापमान नियंत्रित करने में मददगार साबित होंगे। शहरी क्षेत्रों में संस्थानों और खाली पड़े स्थानों पर भी रोपण संभव है। भूमि की कमी के कारण बड़े ब्लॉक बनाना मुश्किल है, लेकिन छोटी-छोटी जगहों का भी सही उपयोग किया जाए तो असर दिख सकता है।