Monday, March 24, 2025

न्यायप्रिय महारानी अहिल्याबाई होल्कर

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

31 मई 1725 को अहमदनगर के चौंडी गांव में पैदा हुई अहिल्याबाई एक साधारण किसान की पुत्री थीं। उनका विवाह दस-बारह वर्ष की आयु में खांडेराव होल्कर से हुआ था। पति स्वभाव से उग्र और चंचल था। वह अहिल्याबाई के प्रति अनुदार था। वैवाहिक जीवन में उन्होंने कई तरह के संकट झेले थे। जब वह 29 वर्ष की हुईं, तब उनके पति खांडेराव होल्कर की मौत हो गई। 

अहिल्याबाई ने अपने राज्य के अलावा दूसरे राज्यों में भी लोगों के लिए मंदिर, धर्मशालाएं बनवाईं। लोग उन्हें देवी के रूप में पूजते थे। एक बार की बात है। उनके पुत्र मालेराव होल्कर रथ पर सवार होकर कहीं जा रहे थे। मार्ग में एक बछड़ा खड़ा था जिसकी रथ से टक्कर लगने से मौत हो गई। 

बछड़े की मौत होने पर गाय वहीं आकर खड़ी हो गई। कुछ देर बाद जब उस रास्ते से अहिल्याबाई गुजरीं तो उन्होंने बछड़े के शव के पास गाय को खड़े देखा। उन्होंने मामले का पता लगाया और क्रोध से तमतमाती हुई राजमहल पहुंची। उन्होंने मालेराव की पत्नी से पूछा कि यदि कोई व्यक्ति मां के सामने पुत्र की हत्या कर दे, तो मारने वाले को क्या सजा मिलनी चाहिए। 

उनकी पत्नी ने कहा कि मृत्युदंड मिलना चाहिए। बस, अहिल्याबाई ने अपने पुत्र मालेराव को रथ से कुचलकर मृत्युदंड देने की घोषणा कर दी। इस काम के लिए कोई तैयार नहीं हुआ, तो वह खुद रथ लेकर अपने पुत्र को कुचलने निकली। कहा जाता है कि जब-जब वह मालेराव के पास पहुंचने वाली होती, वह गाय आकर रास्ते में खड़ी हो जाती। 

ऐसा कई बार हुआ, तो लोगों ने अहिल्याबाई को समझाया कि यह गाय भी नहीं  चाहती है कि किसी और मां के बेटे के साथ ऐसा हो। मालेराव को छोड़ दिया गया। कुछ  साल बाद मालेराव की मौत हो गई।



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