Saturday, April 18, 2026

गैस और तेल की कमी भी बढ़ते प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण

अशोक मिश्र

पिछले एक महीने से दिल्ली एनसीआर को प्रदूषण से राहत मिली हुई थी। लेकिन प्रदूषण बढ़ने की वजह से एक बार फिर इमरजेंसी के लिए बनाए गए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान वन को फिर लागू कर दिया गया है। एनसीआर के अंतर्गत आने वाले जिलों सहित पूरे राज्य के अधिकतर जिले पिछले कई दिनों से प्रदूषण की चपेट में हैं। यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले दो दिन दिल्ली-एनसीआर प्रदूषण की चपेट में रहेगा। हरियाणा में भी प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ रहा है। 

ग्रेप वन लागू होने के बाद दिल्ली एनसीआर में निर्माण कार्य और तोड़फोड़ पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। जिन साइटों पर ऐसे कार्य चल रहे हैं, उन्हें सुरक्षात्मक कदम उठाने होंगे। सड़कों की सफाई करते समय पानी का छिड़काव करना होगा और सफाई मशीनों से करनी होगी ताकि किसी प्रकार से धूल न उड़े। निर्माण सामग्री लाने-ले जाने वाले ट्रकों को भी सामग्री ढक कर ही रखना होगा। इस बीच खुले में कूड़ा-करकट जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

हरियाणा में कई जगहों पर यह देखा गया है कि लोग घरों से निकला कूड़ा स्थानीय निकायों द्वारा संचालित कूड़ा इकट्ठा करने वाली गाड़ियों में डालने की जगह रात में जला देते हैं। इससे प्रदूषण बढ़ता है। होटलों और रेस्टोरेंट में तंदूर में लकड़ी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इस बीच हरियाणा और दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने का कारण एलपीजी की कमी को भी माना जा रहा है। 

जब से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच लड़ाई शुरू हुई है, तब से एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति में बाधा आई है। इस वजह से लोगों को छोटे सिलेंडर में गैस भरवाने में दिक्कत आ रही है। गैस के विकल्प में लोगों ने लकड़ी, कोयले और उपलों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। इस वजह से भी प्रदूषण का स्तर काफी हद तक बढ़ा है। 

वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने की वजह से दिल्ली एनसीआर में कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने होटल, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को आंशिक राहत प्रदान की है। सीएक्यूएम ने गैस की कमी को देखते हुए वैकल्पिक ईंधन के उपयोग की इजाजत दे दी है। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने 13 मार्च 2026 को आदेश जारी किया था कि 13 अप्रैल के बाद वैकल्पिक ईंधन हाई स्पीड डीजल, बायोमास, रिफ्यूज्ड डेरिवेड फ्यूल पेलेट्स का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। 

लेकिन अब सीएक्यूएम ने अपने आदेश को थोड़ा ढीला किया है। हरियाणा और दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण की वजह से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा हो रही हैं।  प्रदूषण के चलते बच्चे और बुजुर्ग खासतौर पर प्रभावित हो रहे हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।  आंखों में जलन और फेफड़ों में संक्रमण के रोगी ज्यादा अस्पताल पहुंच रहे हैं।

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