Saturday, April 18, 2026

पहले खुद पर लागू करो, फिर उपदेश दो

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

महात्मा गांधी हमेशा कुछ न कुछ प्रयोग करते रहते थे। वह सत्य बोलने और अहिंसा का पालन करने की शिक्षा देते थे। वह खुद झूठ नहीं बोलते और लोगों से भी अपेक्षा करते थे कि वह झूठ नहीं बोलेंगे। एक बार की बात है। एक बुजुर्ग महिला अपने पौत्र को लेकर महात्मा गांधी के पास पहुंची। 

उसने महात्मा गांधी से मुलाकात करने के बाद कहा कि बापू, मेरा यह पौत्र गुड़ बहुत खाता है। इसकी वजह से इसके दांत खराब हो रहे हैं। इतना ही नहीं, और भी कई तरह की परेशानियां इसे हो रही है। मैं इसे समझाते-समझाते थक गई हूं। आप इसे सीख दीजिए ताकि यह गुड़ खाना छोड़ दे। यह आपकी बात जरूर मानेगा। 

गांधी जी ने उस बुजुर्ग महिला की बात बड़े ध्यान से सुनी और थोड़ी देर बाद  उन्होंने कहा कि आप पंद्रह दिन बाद आएं, मैं इसे कुछ न कुछ सलाह दूंगा। वह बुजुर्ग महिला लौट गई। करीब पंद्रह सोलह दिन बाद वह महिला फिर गांधी के आश्रम में पहुंची। काफी देर इंतजार करने के बाद उसकी मुलाकात गांधी जी से हुई। 

गांधी जी ने उस बच्चे को समझाते हुए कहा कि बेटा, जरूरत से ज्यादा गुड़ खाना नुकसानदायक होता है। इसके बाद वह उस महिला से बोले, आप अब ऐसा करें कि घर में जितना भी गुड़ है। उसमें काली मिर्च पीसकर मिला दें। इससे जब आपका पौत्र उस गुड़ को खाएगा, तो उसे तीखा लगेगा। इससे उसकी आदत छूट जाएगी। काली मिर्च डालने से गुड़ भी लाभदायक हो जाएगा। 

तब उस बुजुर्ग महिला ने कहा कि आप यह बात तो पंद्रह दिन पहले भी बता सकते थे। मुझे दो बार आना पड़ा। तब गांधी जी ने कहा कि दरअसल, तब मैं भी गुड़ बहुत खाता था। पंद्रह दिन में मैंने गुड़ खाना छोड़ा है। अब मैं उसे उपदेश देने के काबिल हूं। किसी को उपदेश देने से पहले खुद पर लागू करना ही उचित होता है।

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