Tuesday, July 21, 2026

नरसंहार देखकर व्यथित हो उठा अशोक

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

मौर्य वंश के शासक सम्राट अशोक को पहले चंड अशोक के नाम से जाना जाता था। अशोक बचपन से ही अत्यंत महत्वाकांक्षी था। वह चक्रवर्ती सम्राट बिंदुसार और रानी धर्मा का पुत्र था। रानी धर्मा क्षत्रिय कुल की नहीं थी, इसलिए उसका बहुत अधिक सम्मान भी नहीं था। 

वैसे तो इतिहास में अशोक के सौ भाई बताए गए हैं, लेकिन तीन भाइयों सुसीम, अशोक और तिष्य के ही नाम मिलते हैं। तिष्य अशोक का छोटा सगा भाई था। कहते हैं कि जब अशोक निर्वासन झेल रहा था, उसी दौरान उसके सौतेले भाइयों ने अशोक की मां की हत्या कर दी। यह समाचार सुनकर अशोक राजमहल लौटा और उसने अपने सभी भाइयों की हत्या कर दी और खुद को सम्राट घोषित कर दिया। 

आठ साल के शासन में उसने अपने राज्य का विस्तार ईरान तक लिया था। उसने अपने शासन को आठ प्रांतों में बांट दिया था। सम्राट बनने के आठवें साल में सम्राट अशोक ने कलिंग पर आक्रमण किया। कहते हैं कि युद्ध समाप्त होने के बाद एक लाख पचास हजार लोग बंदी बनाकर कलिंग से निर्वासित कर दिए गए थे। युद्ध में एक लाख लोग मारे गए थे। डेढ़ लाख सैनिक घायल हुए थे। 

कलिंग में जिधर नजर जाती थी, उस ओर या तो शव दिखाई देते थे या फिर कराहते हुए घायल सैनिक। यह दृश्य अशोक ने देखा तो उसका मन द्रवित हो उठा। उसने बौद्ध भिक्षु उपगुप्त से इसका उपाय पूछा, तो उन्होंने महात्मा बुद्ध का मार्ग अपनाने की सलाह दी। वह बौद्ध के नजदीक आता गया और अंतत: उसने बौद्ध धर्म अपना लिया। इसके बाद वह मानवता की सेवा में लग गया। इस तरह चंड अशोक से देवप्रिय अशोक में बदल गया। सम्राट अशोक द्वारा खुदवाए गए 33 शिलालेख अब तक प्राप्त हो चुके हैं।

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