अशोक मिश्र
पिछले 16 मार्च को राज्यसभा की दो सीटों पर हुए चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग करने वाले पांच कांग्रेसी विधायकों को निलंबित करके पार्टी ने अब गेंद इनके पाले में डाल दी है। निलंबित होने के बाद पुनहाना के विधायक मोहम्मद इलियास, हथीन से मोहम्मद इसराइल चौधरी, नारायण गढ़ से शैली चौधरी, रतिया से जनरैल सिंह और साढौरा से रेनू बाला पार्टी की बैठकों और कार्यक्रमों में भाग नहीं ले सकेंगे। पार्टी की गतिविधियों से एक तरह से इनका नाता टूट गया है।निलंबन के दौरान यदि किसी मामले को लेकर पार्टी ह्विप जारी करती है, तो इन पांचों विधायकों को पार्टी ह्विप को मानना ही पड़ेगा और उसके मुताबिक कार्य करना पड़ेगा। पार्टी ने इन पांचों विधायकों बर्खास्त न करके इन्हें अपने से अलग भी कर दिया है और इन्हें स्वतंत्र भी नहीं छोड़ा है। अब अगर पार्टी उन्हें बर्खास्त कर देती तो ह्विप मानने की बाध्यता ही खत्म हो जाती। वह किसी दूसरे दल में भी चले जाते तो उनकी विधायकी बरकरार रहती। दूसरे दल को अपना समर्थन भी दे सकते थे।
लेकिन अब अगर उन्होंने ह्विप नहीं माना या दूसरे दल में चले गए, तो उनकी विधायकी चली जाएगी। ऐसी स्थिति में उनकी सीटों पर दोबारा उपचुनाव होंगे। पार्टी ने इन्हें निलंबित करके पार्टी से बर्खास्त करने और निलंबन खत्म करने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रख लिया है। राज्यसभा चुनाव में क्रॉास वोटिंग करने के आरोपी विधायकों का निलंबन कांग्रेस का स्मार्ट फैसला मानना जा रहा है।
कांग्रेस ने यह फैसला करके एक तरह से दूसरे नेताओं और कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी में किसी तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। क्रॉस वोटिंग के बाद प्रदेश अनुशासन समिति ने पांचों कांग्रेस विधायकों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा था। इनमें से तीन विधायकों शैली चौधरी, जनरैल सिंह और रेनूबाला ने अपना जवाब समिति को समय पर ही सौंप दिया था।
लेकिन मोहम्मद इसराइल चौधरी और मोहम्मद इलियास ने जवाब देना जरूरी नहीं समझा। कांग्रेस से निलंबित किए गए लगभग पांचों विधायकों ने पार्टी के फैसले से ऐतराज जताया है। सभी का यही कहना है कि वह कुछ ही दिनों में अपने समर्थकों के पास जाएंगे, उनसे विचार विमर्श करेंगे, उसके बाद ही कोई फैसला लेंगे। स्वाभाविक है कि पांचों विधायकों को निलंबित करने का फैसला हाईकमान की मर्जी से लिया गया है।
इसके बावजूद कहना उचित होगा कि हरियाणा कांग्रेस पर जिस तरह गुटबाजी हावी है, उसको देखते हुए करमवीर बौद्ध का राज्यसभा सांसद चुना जाना ही किसी चमत्कार से कम नहीं है। प्रदेश कांग्रेस में हुड्डा गुट की तूती बोलती है। ज्यादातर नेता और कार्यकर्ता इनके साथ हैं, लेकिन कुमारी सैलजा प्रदेश में कांग्रेस की सबसे बड़ी दलित नेता हैं। इनके महत्व को नकारा नहीं जा सकता है।


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