Sunday, April 19, 2026

कभी अविश्वसनीय बात पर विश्वास मत करो

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

ग्रंथों में जितनी भी बातें लिखी हुई हैं, उनको पढ़ने के बाद अगर जीवन में उतारा न जाए, तो वह सारा ज्ञान मिथ्या होता है। ज्ञान का उपयोग ही सबसे उचित होता है। एक बार की बात है। एक राजा की बहुत सुंदर वाटिका थी। उस वाटिका में अंगूर की बेलें लगी हुई थीं। 

राजा को उस वाटिका से खाने के लिए ढेर सारा मीठा-मीठा अंगूर मिला करता था। कुछ दिनों बाद एक चिड़िया उस वाटिका में रोज आने लगी। वह मीठे-मीठे अंगूरों को खाकर खट्टे या अधपके अंगूरों को नीचे गिरा दिया करती थी। वाटिका का माली चिड़िया की इस करतूत से बहुत परेशान हो गया। उसने चिड़िया को पकड़ने का बहुत प्रयास किया, लेकिन उसे पकड़ने में सफल नहीं हुआ। 

एक दिन आजिज आकर माली ने यह बात राजा को बताई। अगले दिन राजा वाटिका में आकर छिप गया और जैसे ही चिड़िया आई, राजा ने उसे पकड़ लिया। राजा जब उसे मारने लगा, तो चिड़िया ने कहा कि हे राजा! तुम मुझे मत मारो। मैं तुम्हें ज्ञान की चार बातें बताती हूं। राजा ने कहा कि तुरंत बताओ। चिड़िया ने कहा कि पहली बात तो यह है कि हाथ आए शत्रु को कभी जिंदा मत छोड़ो। 

राजा ने कहा-दूसरी बात बता। चिड़िया ने कहा कि कभी असंभव बात पर विश्वास मत करो। तीसरी बात यह है कि अतीत को याद करके पश्चाताप मत करो। इतना कहकर चिड़िया ने कहा कि मेरा दम घुट रहा है। थोड़ा ढील दो, ताकि मैं चौथी बात कह सकूं। राजा ने जैसे ही हथेली ढीली की, चिड़िया उड़कर डाल पर जा बैठी और कहा कि मेरे पेट में दो अनमोल हीरे हैं। 

अब राजा पछताने लगा। तब चिड़िया ने कहा कि आपने मेरी चारों ज्ञान की बातें नहीं मानी। मैं आपकी शत्रु थी, आपने जिंदा छोड़ दिया। हीरे की काल्पनिक बात को जानकर पछता रहे हैं।

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