Saturday, July 25, 2026

जो अपनी मेहनत का खाते हैं, मुझसे श्रेष्ठ हैं

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

पाकिस्तान और उत्तर भारत में हातिम ताई एक जाना पहचाना नाम है। हातिम ताई से जुड़ी किस्से-कहानियां बड़े शौक से सुनी-सुनाई जाती है। छठी शताब्दी में अरब में पैदा हुए हातिमताई अपनी दानशीलता के लिए काफी प्रसिद्ध थे। अरब देशों में हातिमताई आज भी नायक की तरह याद किए जाते हैं। अरब की ताई जनजाति पैदा हुए हातिम का पूरा नाम हातिम बिन अब्दुल्लाह बिन साद अल ताई था। कहा जाता है कि उनके पुत्र अदी बिन हातिम ताई थे, जो इस्लामिक पैगंबर मुहम्मद के साथी थे।

 वह एक शासक होने के साथ-साथ कवि भी थे। उनके पास जो भी व्यक्ति मदद मांगने आता था, वह खाली हाथ नहीं जाता था। यदि उनका कोई दुश्मन भी उनसे मदद मांगता था, तो वह उदार मन से उसकी मदद करते थे। एक दिन जब वह अपने मित्रों के साथ बैठे थे, तो उनके एक मित्र ने पूछा कि हातिम, क्या तुम किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हो, जो तुमसे भी श्रेष्ठ हो। 

हातिम ताई ने हंसते हुए कहा, हां! मैं ऐसे आदमी को जानता हूं जो मुझसे भी काफी अच्छा है। मित्र के पूछने पर उन्होंने बताया कि एक बार मैंने अपने महल में बहुत बड़े भोज का आयोजन किया। उस भोज में बहुत सारे लोग आए। सबने पकवान का स्वाद लिया। शाम होने से पहले मैं घूमने निकला, तो देखा कि एक व्यक्ति लकड़ी काटकर घर ले जा रहा था। मैंने उससे कहा कि आज हातिम ताई ने भोज दिया था, तुम वहां जाकर खाना खा सकते थे। कम से कम आज मेहनत करने से बच जाते। 

उस आदमी ने कहा कि मैं अपनी मेहनत की कमाई खाता हूं। मैं दिन भर में जो कुछ अर्जित करता हूं, उससे अपना और अपने परिवार का पेट भरता हूं। मुझे किसी के यहां भोज पर जाने की जरूरत नहीं है। उस आदमी को देखकर मैंने जाना कि बहुत सारे लोग जो अपनी मेहनत का खाते हैं। वह मुझसे श्रेष्ठ हैं।

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