गेहूं का ढेर सड़कों और मंडियों में लगा हुआ है। इस अनाज का कोई पुरसाहाल नहीं है। राज्यभर की मंडियों से अब तक जो आंकड़ा मिल रहा है, उसके मुताबिक राज्य मंडियों में अब तक 80.39 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई है। इसमें से 58.28 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है। बाकी अनाज अभी तक मंडियों में ही पड़ा हुआ है। जहां तक अनाज की उठान का मामला है, अभी तक कुल 30.14 लाख मीट्रिक टन का ही उठान हो पाया है। हालत यह है कि 12 अप्रैल को खरीदा गया गेहूं अभी तक उठाया नहीं गया है।
आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान रघुवीर चट्ठा का कहना है कि छह दिन पहले एसोसिएशन और किसानों ने मंडियों की अव्यवस्था को लेकर रोष जताया था। तब प्रशासन ने आश्वासन देते हुए कहा था कि पहले केंद्र की सड़कों से गेहूं उठाया जाएगा। इसके बाद प्लेटों से गेहूं उठान शुरू किया जाएगा। लेकिन हालत आज तक नहीं सुधर हैं। इससे आढ़तियों में काफी रोष है।
उठान न होने की वजह से किसानों को भुगतान मिलने में भी देरी हो रही है। धीमी उठान की वजह से 11.3 प्रतिशत भुगतान किसानों को नहीं हो पाया है। किसान अपने खातों को बार-बार चेक करते हैं और फिर मायूस हो जाते हैं। अभी तक 6269.09 करोड़ रुपये में से कुल 2474.93 करोड़ रुपये का ही भुगतान हो पाया है। आढ़तियों का कहना है कि उठान प्रक्रिया जानबूझकर धीमी की जा रही है।
इतना ही नहीं, आढ़तियों से प्रति कट्टा सात रुपये की अवैध वसूली की जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक, इस तरह हर सीजन में लगभग पचास लाख रुपये का खेल किया जाता है। मंडियों में पैदा हुई अव्यवस्था के चलते आढ़तियों और किसानों में भारी रोष भी देखने को मिल रहा है। किसान संगठनों ने धीमी उठान और मंडियों में अव्यवस्था को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी है। सरकार और स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वह ट्रांसपोर्टरों, माल ढुलाई और उठान से जुड़ी एजेंसियों पर कठोर कार्रवाई करे, ताकि काम में तेजी आए।

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