अशोक मिश्र
हरियाणा में भूगर्भ जलसंकट लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुग्राम जिले के मानेसर क्षेत्र में कई गांवों का भूगर्भ जलस्तर सात सौ फीट नीचे पहुंच गया है। गांव नाहरपुर कासन, कांकरौला, शिकोहपुर और हयातपुर में अंडरग्राउंड टैंक बनाए गए हैं जिससे सप्लाई के लिए पाइप डालकर लोगों को पानी मुहैया कराया जाएगा। मानेसर इलाके में हालत यह है कि पानी की कमी की वजह से लोग पलायन करने पर मजबूर हैं। यह कोई अचानक घटी घटना नहीं है। भूगर्भ जलस्तर लगातार नीचे जाने की प्रक्रिया दशकों से चल रही थी।
उसके परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं। यह प्रक्रिया जब अपने चरम पर पहुंची है, तब लोगों को होश आया है कि हम लगातार संकट में घिरते जा रहे हैं। रिपोर्टें बताती हैं कि मानेसर के वार्ड 13 के गांव खोह जैसे इलाकों में तो हालात इससे भी बुरे हैं, जहां भूजल स्तर आठ सौ से एक हजार फुट तक पहुंच चुका है और सभी बोरवेल से पानी आना बंद हो गया है। सच तो यह है कि मानेसर की यह कहानी धीरे-धीरे पूरे राज्य की कहानी में तब्दील होती जा रही है।
केंद्रीय भूजल बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक राज्य के 142 में से 85 ब्लॉक ओवर-एक्सप्लॉइटेड यानी अति-दोहित श्रेणी में हैं। गुड़गांव, फरीदाबाद, सोनीपत, करनाल और कुरुक्षेत्र के कई हिस्सों में वॉटर लेवल हर साल 1 से 3 फीट तक नीचे जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह खेती है। धान-गेहूं का चक्र और ट्यूबवेल पर मुफ्त या सस्ती बिजली ने पानी के अंधाधुंध इस्तेमाल को बढ़ावा दिया। किसानों ने हरित क्रांति के नाम पर गैर जरूरी पानी का दोहन किया। नतीजा यह हुआ कि धरती के नीचे से पानी खींचते रहे, अपना काम चलाते रहे, लेकिन रिचार्ज करने की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
इसके लिए केवल खेती ही जिम्मेदार नहीं है। राज्य के हर जिले में लगी छोटी-बड़ी फैक्ट्रियों ने अपने उपयोग के लिए अंधाधुंध जल दोहन किया। खेती की जमीन पर बसी बड़ी बड़ी कालोनियों और बस्तियों में रहने वाले लोगों ने भी पानी का कम दोहन नहीं किया है। घरों, फैक्ट्रियों और कंस्ट्रक्शन के लिए बोरवेल गहरे होते गए और रिचार्ज के लिए तालाब, जोहड़ और बारिश का पानी जमीन में नहीं जा पा रहा क्योंकि कंक्रीट बढ़ती जा रही है। जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट खुद कहती है कि दक्षिण हरियाणा में भूजल दोहन खतरनाक स्तर पर है और गुरुग्राम व फरीदाबाद जैसी जमीन के रेगिस्तान बनने का खतरा मंडराने लगा है।
एक अध्ययन बताता है कि 2003 से 2020 के बीच अकेले पंजाब-हरियाणा ने 64.6 बिलियन क्यूबिक मीटर भूजल खो दिया है। यह कोई आंकड़ा नहीं, आने वाली पीढ़ियों के हिस्से का पानी है जो हमने बिना सोचे खर्च कर दिया। यदि हमने अभी ध्यान नहीं दिया, तो आने वाली पीढ़ियां हमें जरूर कोसेंगी। हमें अभी से ही पानी की बचत पर पूरा ध्यान देना होगा, ताकि हरियाणा का पानी बचा रहे।
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