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Thursday, June 4, 2026

फिल्म देखकर रो पड़े अल्बर्ट आइंस्टीन

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

जब दो महान हस्तियां एक दूसरे से मिलती हैं तो उनमें जो संवाद होता है, वह बड़ा ही रोचक, ज्ञानवर्धक और मनोरंजक होता है। कभी किसी ने महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन से किसी ने पूछा था कि वह फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों में से किससे मिलना पसंद करेंगे? तब उन्होंने जवाब दिया था कि वह मूक फिल्मों के हास्य कलाकार चार्ली चैपलिन से मिलना पसंद करेंगे। 

बीसवीं सदी के महान वैज्ञानिकों में अल्बर्ट आइंस्टीन की चर्चा होती है। मानव समाज की सेवा करने में अल्बर्ट आइंस्टीन का कोई मुकाबला नहीं था। वहीं चार्ली चैपलिन ने अपने जीवन में काफी संघर्ष किया था। वह फर्श से अर्श तक पहुंचे थे। उनकी फिल्मों में संवाद न होते हुए भी भावनाएं बड़ी बारीकी से प्रकट हो जाती थीं। 

बात 2 फरवरी 1931 की है। लास एंजिल्स में चार्ली चैपलिन की फिल्म सिटी लाइट्स का प्रीमियर शो रखा गया था। इस शो में अल्बर्ट आइंस्टीन भी पहुंचे थे। संयोग से चार्ली चैपलिन भी अपनी फिल्म का शो देखने थिएटर में आए हुए थे। इन दोनों महान हस्तियों को देखते ही भीड़ पागल हो गई। वह उनके स्वागत में शोर मचाने लगी। लोग उनको देखने और हाथ मिलाने के लिए बेताब हो गए। 

तब आइंस्टीन ने चैपलिन से कहा कि आपकी कला में मुझे सबसे ज्यादा जो बात पसंद है, वह है आपकी सार्वभौमिकता। आप एक शब्द नहीं बोलते, फिर भी पूरी दुनिया आपको समझती है। तब चैपलिन ने तपाक से कहा कि यह सच है। लेकिन आपकी प्रसिद्धि इससे भी बड़ी है। दुनिया आपकी तब भी तारीफ करती है, जब कोई आपको समझता ही नहीं है! फिल्म देखने के दौरान चैपलिन यह देखकर दंग रह गए कि अंतिम दृश्य देखकर आइंस्टीन की आंखों में आंसू आ गए थे।