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Sunday, June 8, 2025

पलायन करने वाले मरीज टीबी मुक्त हरियाणा की राह में सबसे बड़ी बाधा

अशोक मिश्र

आज से तीस-पैंतीस साल पहले जब किसी व्यक्ति को पता चलता था कि उसे क्षय रोग यानी टीबी है, तो वह समाज से इस बात को छिपाने की कोशिश करता था। लोगों को पता चलने पर एक तरह से सामाजिक बहिष्कार ही कर देते थे। उसके पूरे परिवार के साथ उठना बैठना, मिलना-जुलना लोग बंद कर देते थे। दुकानदार भी सामान देने में आनाकानी करते थे। इसका कारण यह था कि क्षय रोग खांसने, थूकने से दूसरों में फैलता है। इसके रोगाणु हवा में फैलकर दूसरों को रोगी बना सकते हैं। 

तब इलाज भी कम ही हो पाता था। लेकिन आज टीबी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। पिछले साल 7 दिसंबर 2024 से केंद्र सरकार ने सौ दिन में पूरे देश को टीबी मुक्त करने का अभियान चलाया था। यह अभियान हरियाणा में भी चला था। बड़े पैमाने पर लोगों की जांच की गई। यह सही है कि रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ। सरकार ने आवश्यक कदम उठाए। लेकिन कुछ मरीज ऐसे भी थे जो दूसरे प्रदेश से अल्पकालिक रोजगार करने के लिए हरियाणा आए थे। वह अपने प्रदेश लौट गए।

ऐसे मरीजों की दवा का कोर्स पूरा नहीं हुआ। यही नहीं, उन्होंने अपने प्रदेश में जाकर सरकारी या गैर सरकारी अस्पतालों में भी संपर्क नहीं किया। ऐसे मरीज खुद के लिए तो सबसे बड़ा खतरा हैं ही, दूसरों के लिए भी किसी मुसीबत से कम नहीं हैं। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए पंचकूला में शुक्रवार को दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल, उत्तराखंड, चंडीगढ़ आदि राज्यों के चिकित्सा अधिकारियों की एक समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य से पलायन करने वाले टीबी के मरीजों के लिए एक मानक संचालन सिस्टम बनाने पर भी बात हुई। 

बैठक में यह भी तय किया गया कि दूसरे राज्यों से आने वाले मरीजों के इलाज के लिए राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा और उन्हें आवश्यक दवाएं और पोषण प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा। हरियाणा में टीबी रोगियों की संख्या भी कम नहीं है। हरियाणा में 2017 में टीबी के केस 38,444 दर्ज किए थे। वहीं, सन 2024 में टीबी मरीजों की संख्या 86,704 पहुंच गई। मरीजों की संख्या बीते तीन-चार साल में बहुत तेजी से बढ़ी है।

 हालांकि इसका कारण यह था कि चार-पांच साल पहले बहुत कम संख्या में लोगों की जांच होती थी। लेकिन तीन-चार साल में सरकार और लोग खुद इस मामले में जागरूक हुए हैं। नतीजतन जांच का दायरा बढ़ा है। इससे मरीज भी बढ़े हैं। 2022 में कुल 31,632 मरीजों की जांच हुई थी। 2023 में 6,16,000 मरीजों की जांच की गई। अगले साल यानी साल 2024 में 7,19,900 मरीजों को जांच हुई।

Tuesday, May 27, 2025

दोहान और कृष्णावती नदी को फिर से जिंदा करने का सराहनीय प्रयास

अशोक मिश्र

पूरी दुनिया पेयजल संकट के दौर से गुजर रही है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं। धरती का तापमान बढ़ता जा रहा है। पेयजल के उपभोक्ता बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन पेयजल की मात्रा घटती जा रही है। अब तो लोग कहने लगे हैं कि अगला विश्व युद्ध पानी के लिए लड़ा जाएगा। यह बात किसी हद तक सही साबित हो रही है। भारत में ही कई प्रांत एक दूसरे से नदी जल के बंटवारे को लेकर आपस में लड़ रहे हैं। 

हरियाणा और पंजाब का सबसे नया उदाहरण है। रावी-ब्यास नदी जल बंटवारे को लेकर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान आमने-सामने हैं। भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड पर दबाव डालकर पंजाब ने हरियाणा के हिस्से का चार हजार क्यूसेक पानी रोक लिया है। वह हरियाणा के हिस्से का साढ़े आठ हजार क्यूसेक पानी देने को तैयार नहीं है। ठीक इसी तरह कावेरी नदी के जल को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी आपस में काफी वर्षों से लड़ रहे हैं। इतना ही नहीं, कृष्णा नदी जल विवाद चार राज्यों महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के बीच काफी समय से सुलझ नहीं पाया है। 

नर्मदा नदी के जल को लेकर गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र आपस में लड़ रहे हैं। गोदावरी के पानी को लेकर महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच चल रहे विवाद को अब तक सुलझाया नहीं जा सका है। महादेई नदी के पानी के बंटवारे को लेकर तीन राज्य कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र आपस में लड़ रहे हैं। आंध्र प्रदेश और ओडीसा के बीच पिछले कई वर्षों से वंशधारा नदी जल को लेकर चल रहा विवाद आज तक नहीं सुलझ पाया है। इतना ही नहीं, तीस्ता नदी के जल बंटवारे को लेकर दो देश भारत और बांग्लादेश आपस में कई प्रकार के समझौते कर चुके हैं, लेकिन उसका मुकम्मल हल नहीं निकल पाया है। 

हरियाणा ने पंजाब के पानी रोक देने के बाद से दक्षिण हरियाणा को होने वाले जल संकट से बचाने के लिए लगभग विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई दो नदियों को पुनर्जीवित करने जा रहा है। जल संकट की समस्या का स्थायी निदान यही है कि जो नदियां सूख गई हैं या जिनकी जलधारा संकुचित हो गई है, उनको बचाने का हर संभव प्रयास किया जाए। लोग नदी क्षेत्र में घर बना लेते हैं जिसकी वजह से नदियों को स्वाभाविक प्रवाह नहीं मिल पाता है।

 हरियाणा सिंचाई विभाग ने 45 साल पहले बंद हो गई दो नदियों दोहान और कृष्णावती को जवाहर लाल नेहरू नहर से जोड़कर उसे पुनर्जीवित करने की ठान ली है। इसके लिए जेएलएन नहर से 1600 एमएम की पाइप डालकर दोनों नदियों को जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।


प्रतीकात्मक चित्र

हरियाणा पंजाब जल विवाद को सुलझा लें तो बेहतर

अशोक मिश्र

सुप्रीमकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा के बीच चल रहे जल विवाद के मामले में अपना फैसला फिलहाल सुरक्षित रख लिया है। यह फैसला किसके पक्ष में होगा, यह अभी कह पाना तो आसान नहीं है। लेकिन ऐसा विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला लेगा, वह हरियाणा के हितों को अवश्य ध्यान में रखेगा। पंजाब की भगवंत मान सरकार ने लगभग दो ढाई महीने पहले बिना किसी चेतावनी के साढ़े आठ हजार क़्यूसेक पानी की जगह साढ़े चार हजार क़्यूसेक पानी की ही सप्लाई देनी शुरू कर दी थी। हरियाणा के विरोध करने पर पंजाब सरकार ने कहा की हरियाणा अपने हिस्से का पानी पहले ही ले चुका है। 

जिस समय पंजाब में यह कदम उठाया था, उस समय भी प्रचंड गर्मी पड़ रही थी। नतीजा यह हुआ कि हरियाणा की 12 -13 जिलों में पानी को लेकर हाहाकार मच गया। टैंकर माफियाओं ने आपदा में अवसर समझ कर पानी के दाम बढ़ा दिए। चार-पांच सौ रुपये में बिकने वाले एक टैंकर पानी के दाम देखते ही देखते 1200 से 1800 के बीच पहुंच गया। 12 जिलों में एक चौथाई जलघर पूरी तरह से सूख गए। इन जिलों के 600 से अधिक जलघरों में से आधे मैं सिर्फ 50% पानी बचा था। देखते ही देखते हरियाणा और पंजाब के बीच का पानी विवाद राजनीतिक रूप लेने लगा। हरियाणा के सभी विपक्षी दल जहां अपनी सरकार के साथ खड़े हुए, वहीं पंजाब में भी यही सीन देखने को मिला। हरियाणा ने अपने हिस्से का पानी मांगने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 

केंद्र सरकार से गुहार लगाई, लेकिन मामला सुलझ नहीं पाया। भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड का रवैया निष्पक्ष रहा, इसे देखते हुए पंजाब सरकार ने बीबीएमबी कार्यालय पर पुलिस तैनात कर दिया। पंजाब सरकार ने जिस कार्यालय से वाटर डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेट होता था, उसे कार्यालय में ताला लगाकर चाबी अपने पास रख ली। भविष्य में ऐसी कोई स्थिति न पैदा हो, इसके लिए केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने सीआईएसएफ की एक यूनिट को बीबीएमबी कार्यालय पर नियुक्त करने का फैसला किया है। यह बात सही है कि अब हरियाणा को साढ़े आठ हजार क़्यूसेक पानी मिलने लगा है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला निर्णायक होगा क्योंकि इस फैसले के बाद उम्मीद की जा रही है कि पंजाब सरकार किसी तरह का विवाद भविष्य में नहीं खड़ा करेगी। 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और राजस्थान  सरकार को मनाना ही पड़ेगा। इसके अलावा उनके पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है।  वैसे पंजाब और हरियाणा के बीच पानी को लेकर विवाद पहले से ही चल रहा है। सतलुज यमुना लिंक नहर को लेकर सन 1960 से पैदा हुआ विवाद अब तक नहीं सुलझ पाया है।

 एसवाईएल मामले को लेकर सन 1960 से लेकर अब तक कई बार मामला सुप्रीम की कोर्ट की चौखट तक पहुंच चुका है। हरियाणा ने अपने हिस्से की नहर तक तैयार कर ली है, लेकिन पंजाब वल अपने हिस्से की नहर तैयार करने को राजी नहीं है। ऐसी स्थिति में दोनों प्रदेश की जनता के हित में यही है की दोनों राज्यों के कर्ताधर्ता आपस में बैठकर यह मामला सुलझा ले।

Monday, May 19, 2025

युवाओं की जल्दी अमीर होने की लालसा बना रही राष्ट्रद्रोही

अशोक मिश्र

हरियाणा और पंजाब में अब तक छह लोग राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाए गए हैं। पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया है। आपरेशन सिंदूर के बाद सुरक्षा एजेंसियां काफी सतर्क हो गई हैं। वैसे तो सुरक्षा एजेंसियां हमेश सतर्क रहती है, लेकिन जब देश पर किसी किस्म का संकट हो, युद्धकाल हो तो सुरक्षा एजेंसियां कुछ ज्यादा ही सक्रिय हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में थोड़ी सी भी चूक पूरे देश के लिए घातक हो सकती हैं। 

पहलगाम में ही सुरक्षा एजेंसियों की थोड़ी सी चूक 26 निर्दोष नागरिकों पर भारी पड़ गई। उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। इस चूक से सुरक्षा एजेंसियों ने सबक सीखा और उसी का नतीजा है कि देश भर में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों को गिरफ्तार करने में सुरक्षा एजेंसियों को कामयाबी मिली है। हरियाणा और पंजाब में अब तक छह लोग पाकिस्तान को खुफिया जानकारी देने के आरोप में गिरफ्तार किए जा चुके हैं। हिसार से ट्रैवल ब्लागर ज्योति रानी उर्फज्योति मलहोत्रा को गिरफ्तार किया गया है। 

इस पर देश की संवेदनशील और सेना से जुड़े गोपनीय जानकारियां पाकिस्तान को देने का आरोप है। ज्योति मलहोत्रा अब तक तीन बार पाकिस्तान जा चुकी है। दो बार तो वह सिख जत्थेबंदियों के साथ करतारपुर साहिब गई थी और एक बार वह अकेली गई थी। तीन बार वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों और आतंकी संगठनों में काम करने वाले लोगों से मिली थी। ज्योति मलहोत्रा पाकिस्तान के अलावा दुबई, थाईलैंड, इंडोनेशिया, भूटान, चीन और बांग्लादेश की भी यात्रा कर चुकी है। 

अगर राष्ट्रविरोधी कार्यों में लिप्त पाए गए अपराधियों की पारिवारिक पृष्ठभूमि का पता लगाया जाए, तो इनमें से ज्यादातर लोग निम्न आय वर्ग या मध्यम आयवर्ग के लोग ही मिलेंगे। गरीबी में पले बढ़े युवाओं की खूब धन कमाने, ऐशोआराम की जिंदगी गुजारने की इच्छा ही इन्हें ले डूबती है। अगर ज्योति मलहोत्रा की ही बात करें, तो 58 वर्ग गज के मकान में रहने वाली ज्योति को बचपन से ही खूब धन कमाने की इच्छा थी। पाक खुफिया एजेंसी ने उसको पैसे का लालच दिया, तो वह राष्ट्रविरोधी काम करने के लिए भी तैयार हो गई। 

युवाओं में जल्दी से जल्दी अमीर हो जाने और ज्यादा से ज्यादा बैंक बैलेंस जमा कर लेने की प्रवृत्ति का ही फायदा दुश्मन देश के एजेंट उठा रहे हैं। वह युवाओं की इसी मानसिकता का फायदा उठाकर उन्हें राष्ट्रविरोधी कार्य करने को प्रेरित कर रहे हैं। इसके लिए उन्हें भले ही पैसे खर्च करने पड़ें, हनी ट्रैप में फंसाना पड़े या कोई दूसरा रास्ता अख्तियार करना पड़े, दुश्मन देश सब कुछ करने को तैयार है। बेरोजगार और बेसब्र युवा दुश्मनों की चंगुल में फंसकर राष्ट्र विरोधी बन रहे हैं।