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Monday, June 9, 2025

हरियाणा में कांग्रेस संगठन खड़ा करने की जद्दोजहद हुई तेज

अशोक मिश्र

हरियाणा के कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। यह उत्साह कितने दिन तक स्थायी रहता है, यह तो भविष्य ही बताएगा, लेकिन राहुल गांधी की पिछले दिनों हरियाणा यात्रा ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और छोटे नेताओं में यह विश्वास जरूर जगा दिया है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस के हालात अच्छे हो जाएंगे। पिछले दिन चंडीगढ़ में प्रदेश स्तर के नेताओं और पार्टी पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में राहुल गांधी ने एक बात तो साफ कर दी है कि अब पार्टी में गुटबाजी स्वीकार नहीं की जाएगी। 

पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाला बयान या गतिविधि को अंजाम देने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैठक को लेकर मीडिया जगत में जो बातें सामने आई हैं, उसके मुताबिक लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुटबाजी में शामिल कुछ नेताओं को बुरी तरह फटकार लगाई है। राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं को यह बात साफ तौर पर बता दी है कि कांग्रेस संगठन तैयार करने में और जिलाध्यक्ष से लेकर ब्लाक स्तर तक पदाधिकारियों की नियुक्ति में किसी भी नेता की सिफारिश नहीं चलेगी। जिस भी नेता ने किसी की सिफारिश की तो उसके भी खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

राहुल गांधी ने हरियाणा में पार्टी संगठन खड़ा करने की जिम्मेदारी केंद्रीय संगठन द्वारा नियुक्त किए गए आब्जर्वरों और स्थानीय आब्जर्वरों को सौंप दी है। कांग्रेस हाई कमान ने प्रत्येक जिले के लिए आब्जर्वर तैनात कर दिए हैं। यह पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलकर, उनसे राय मशविरा करने के बाद जिलाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों के नाम तय करके हाई कमान को सौंपेंगे। इन नामों में अगड़ा, पिछड़ा, दलित जैसे सभी समुदाय से छह विकल्प होंगे। कहा तो यह भी जा रहा है कि यदि किसी जिले में कोई ऐसा व्यक्तित्व जिसने किसी क्षेत्र में विशेष ख्याति अर्जित की हो और वह पार्टी सदस्य हो, पार्टी की विचारधारा में उसकी आस्था हो, तो उसे भी जिलाध्यक्ष बनाया जा सकता है। 

इसके लिए यह जरूरी है कि वह युवा हो। राहुल गांधी प्रदेश की कमान अब युवाओं को सौंपना चाहते हैं। इसके बाद राजनीतिक गलियारे में यह बात भी कही जाने लगी है कि प्रदेश में जितने भी बुजुर्ग नेता हैं या जो गुटबाजी में शामिल हैं, वह साइड लाइन किए जा सकते हैं। उनकी भूमिका संगठन और विधायकों को बस सलाह देने तक ही सीमित रह सकती है। हालांकि राहुल गांधी ने संगठन बनाने के लिए जो समय सीमा तय की है, वह बहुत कम है। 

पिछले 11 साल में कांग्रेस हाईकमान ने आठ प्रभारी नियुक्त किए, लेकिन वह प्रदेश में कांग्रेस का मजबूत संगठन तैयार करने में सफल नहीं हो सके। ऐसी स्थिति में दो या तीन महीने में पूरे प्रदेश में संगठन तैयार कर पाना, कठिन प्रतीत हो रहा है।

Tuesday, June 3, 2025

हरियाणा में फिर से कांग्रेस संगठन खड़ा कर पाएंगे राहुल गांधी?

अशोक मिश्र

हरियाणा कांग्रेस संगठन को पटरी पर लाने की कवायद के तहत चार जून को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी चंडीगढ़ आ रहे हैं। राहुल गांधी के हरियाणा आगमन के सिलसिले में कांग्रेस नेताओं की गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजनीतिक हलकों में जो चर्चा है, उसके मुताबिक राहुल गांधी का हरियाणा आगमन मुख्यत: दो बातों को लेकर है। पहला तो यह है कि हरियाणा में मृतप्राय संगठन को फिर से खड़ा किया जाए। ठीक उसी तरह जिस तरह आज से ग्यारह-बारह साल पहले कांग्रेस संगठन हुआ करता था। 

हर जिले, हर ब्लाक और गांव स्तर पर कांग्रेस को अपना संगठन खड़ा करने के लिए प्रदेश स्तर के सभी नेताओं को एकजुट होकर अपना खून पसीना एक करना होगा। जब कोई संगठन एक बार छिन्न भिन्न हो जाता है, तो उसको दोबारा पुरानी स्थिति में लाने में काफी मेहनत करनी पड़ती है। नया संगठन तैयार करने की अपेक्षा पुराने संगठन को ही झाड़-पोंछकर खड़ा करना काफी दुरूह हो जाता है। 

किसी पार्टी संगठन के कार्यकर्ताओं का एक बार जब विश्वास नेताओं पर से टूट जाता है, तो उस विश्वास को कायम करने में अधिक श्रम और समय लगता है। उन्हें विश्वास नहीं हो पाता है कि पार्टी के नेता सचमुच सक्रिय हो गए हैं। वैसे एक बात यह भी है कि लोग उस दल से जुड़ना ज्यादा पसंद करते हैं जिसकी प्रदेश या देश में सत्ता होती है। यह एक मानवीय प्रवृत्ति है। ज्यादातर लोग सत्ता के साथ जुड़कर अपना हित साधना चाहते हैं। जिनकी आस्था किसी पार्टी के दर्शन और सिद्धांत के प्रति होती है, वह अपनी पार्टी में बने रहते हैं। 

वरिष्ठ नेताओं का रवैया ठीक न हो या गुटबाजी हो जाए, तो ऐसे कार्यकर्ता निष्क्रिय हो जाते हैं। राहुल गांधी चार जून को जिला स्तर पर संगठन खड़ा करने का प्रयास करेंगे, ऐसी चर्चा है। राहुल गांधी के चंडीगढ़ आगमन का दूसरा कारण प्रदेश स्तरीय नेताओं के बीच चल रही गुटबाजी को खत्म करना है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने प्रदेश कांग्रेस में कई वर्षों से अपनी जड़ें जमाए बैठी गुटबाजी को खत्म करने का प्रयास किया था, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई थी। अब उन्होंने एक बार फिर नेताओं की गुटबाजी खत्म करने के लिए एक और प्रयास करने का मन बनाया है। 

वह अपने प्रयास में कितना सफल हो पाते हैं, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन एक बात अवश्य कही जा सकती है कि जब तक बुजुर्ग हो चुके अड़ियल नेताओं को दरकिनार नहीं किया जाता, तब तक बात बनने वाली नहीं है। सबसे पहले तो प्रदेश की कमान उस व्यक्ति को सौंपनी होगी, जो युवा हो, उत्साही हो और पार्टी के प्रति पूरी तरह समर्पित हो। वह सभी गुटों से बाहर का होना चाहिए।

Wednesday, May 28, 2025

हरियाणा में कांग्रेस संगठन खड़ा कर पाना कतई आसान नहीं

अशोक मिश्र

पिछले साल हरियाणा में हुए विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी कांग्रेस के नेताओं के रवैये में थोड़ा सा भी बदलाव नहीं आया है। चुनाव से पूर्व पूरे प्रदेश में यह बात कही जा रही थी कि इस बार का दस साल का सूखा खत्म करके अपनी सरकार बना सकती है। मीडिया में भी यह बात खुलेआम कही जाने लगी थी। सरकार बनने की थोड़ी सी संभावना दिखते ही कांग्रेसी नेताओं का जोश उबाल मारने लगा और प्रदेश कांग्रेस के तीनों गुट मुख्यमंत्री पद के दावेदार बनकर एक दूसरे की आलोचना करने लगे। खुलेआम मीडिया में एक दूसरे को चुनौती दी जाने लगी। नतीजा वही हुआ, माया मिली न राम।  

हार के बाद भी प्रदेश कांग्रेस के नेताओं में मिल जुलकर पार्टी को फिर से खड़ा करने की समझ नहीं पैदा हुई। हरियाणा कांग्रेस की स्थिति कितनी दयनीय है कि अभी तक विधानसभा में नेता विरोधी दल का चुनाव तक नहीं हो पाया है। अब मीडिया में यह कहा जाने लगा है कि प्रदेश कांग्रेस की आपसी उठापटक और गुटबाजी से नाराज राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का यहां के नेताओं पर विश्वास ही नहीं रह गया है। वह प्रदेश कांग्रेस के नेताओं की कोई बात ही नहीं सुन रहे हैं। कहा तो यह भी जाने लगा है कि कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश में 21 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। 

यह पर्यवेक्षक राहुल गांधी के अत्यंत विश्वसनीय लोग बताए जा रहे हैं। प्रत्येक जिलों में नियुक्त किए गए पर्यवेक्षक प्रदेश के नेताओं से किसी तरह का फीडबैक लिए बिना सीधे कार्यकर्ताओं से मिलेंगे। वह उनकी राय जानेंगे, कौन सा नेता कहां तक लोगों में लोकप्रिय है, किसकी छवि पार्टी को नुकसान पहुंचा रही है, किसी गुटबाजी से संगठन को नुकसान पहुंच रहा है, जैसी बातों को पता लगाएंगे। कांग्रेस के आम कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेने के बाद सभी पर्यवेक्षक अपनी अपनी रिपोर्ट हाईकमान के सामने पेश करेंगे। 

इसके बाद ही विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष से लेकर ब्लाक और तहसील स्तर के अध्यक्षों की नियुक्ति की जाएगी। कांग्रेस पिछले ग्यारह साल से प्रदेश की सत्ता से दूर है। हालत तो यह है कि प्रदेश में कांग्रेस का संगठन तक छिन्न-भिन्न हो चुका है। कांग्रेस हाई कमान ने 2014 में फूलचंद मुलाना की जगह पर अशोक तंवर को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी थी। 

लेकिन तंवर प्रदेश कार्यकारिणी में एक भी नियुक्ति नहीं कर सके क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से उनकी बनती नहीं थी। सितंबर 2019 में कुमारी सैलजा को प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने काफी प्रयास किए, लेकिन बात बनी नहीं। अप्रैल 2022 से उदयभान को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, लेकिन मामला वही ठाक के तीन पात वाला रहा।

Tuesday, March 11, 2025

राहुल गांधी को इंतजार किसका है, निकाल फेंके

अशोक मिश्र

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का दो दिवसीय गुजरात दौरे के दौरान दिया गया बयान इन दिनों काफी चर्चा में है। अहमदाबाद में उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस में आधे कार्यकर्ता और नेता ऐसे हैं जिनके मन में कांग्रेस है। बाकी आधे नेता और कार्यकर्ता ऐसे भी हैं जिनमें से आधे भाजपा से मिले हुए हैं। राहुल गांधी की यह बात सही है, लेकिन यह सिर्फ गुजरात के संदर्भ में ही नहीं, पूरे देश के मामले में भी सही हो सकती है। कांग्रेस में बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो कांग्रेस को ही उस समय बैकफुट पर लाकर खड़ा कर देते हैं, जब कांग्रेस कुछ अच्छा करने वाली होती है। गुजरात में पिछले तीस साल से कांग्रेस की सरकार नहीं है। इसके लिए कांग्रेस की कुछ नीतियां और भाजपा की रणनीति जिम्मेदार हो सकती हैं। लेकिन यह भी सही है कि गुजरात में कांग्रेस संगठन काफी हद तक धराशायी हो चुका है। कांग्रेस के ज्यादातर नेता या तो निष्क्रिय हो चुके हैं या फिर उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया है। सन 2022 में हुए गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान ही कांग्रेस के 37 नेताओं ने भाजपा का दामन थाम लिया था। भाजपा ने इन कांग्रेस से आए नेताओं पर दांव लगाया जिसमें से 34 नेताओं ने विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की। यदि प्रदेश नेतृत्व ने इन बागी नेताओं को अपने साथ लेकर चलने का प्रयास किया होता तो 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 156 सीटें हासिल हुई थीं।

पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान ही राजनीतिक विश्लेषकों ने यह कहना शुरू कर दिया था कि गुजरात कांग्रेस के नेताओं में वह उत्साह और पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता नहीं दिखाई दे रही है जिसकी पार्टी को जरूरत है। आधे-अधूरे मन से कांग्रेस नेताओं ने चुनाव लड़ा था। यदि कांग्रेस ने बागी 37 नेताओं को सहेजने में सफलता पाई होती, तो कांग्रेस कम से कम सम्मानजनक सीटें हासिल करने में सफल हो गई होती। उसे सिर्फ17 सीटों पर सिमटना नहीं पड़ता। हां, सन 2017 का जुनाव जरूर गुजरात कांग्रेस ने मन से लड़ा था। भाजपा को बहुत अच्छी टक्कर दी थी। एक बार तो लगने लगा था कि कांग्रेस इस बार गुजरात में अपनी सरकार बनाने में सफल हो जाएगी। लेकिन उसी दौरान प्रधानमंत्री आवास पर पाकिस्तानी अधिकारियों की बैठक को लेकर कांग्रेसी नेता मणि शंकर अय्यर ने एक ऐसा बयान दिया कि सारा माहौल ही पलट गया। मोदी नीच है कहकर उन्होंने कांग्रेस की जीती हुई बाजी हारने पर मजबूर कर दिया। उस दौरान चौथे चरण का मतदान होना बाकी था और मोदी जी ने इसी मुद्दे को गुजराती अस्मिता से जोड़कर हारती हुई भाजपा को जिता दिया था।

राहुल गांधी का यह कहना सही है कि कांग्रेस में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो गाहे-बगाहे अनर्गल बयान देकर भाजपा को बैठे बिठाए मुद्दा देते रहते हैं। ऐसे नेता सिर्फमणि शंकर अय्यर ही नहीं है, ढेर सारे हैं। जब तक इन नेताओं को पार्टी से बाहर नहीं किया जाता। नए और उत्साही कार्यकर्ताओं, नेताओं को गांव और ब्लाक स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक बागडोर नहीं दी जाती, तब तक किसी भी राज्य में कांग्रेस का भला नहीं हो सकता है। सबसे पहले तो कांग्रेस हाईकमान को प्रदेशों और केंद्रीय संगठन में चल रही गुटबाजी को खत्म करना होगा। संगठन में वरिष्ठ होने के नाते बड़े-बड़े पदों पर कब्जा जमाकर निष्क्रिय नेताओं को हाथ पकड़कर बाहर करना होगा। उसकी जगह युवाओं को यह जिम्मेदारी देनी होगी। जो भी पार्टी विरोधी काम करता मिले, उसके निकल जाने का इंतजार करने से बेहतर है कि उसे तुरंत कान पकड़कर बाहर कर दिया जाए। अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी काम करने वाले पार्टी को बहुत अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। यदि शरीर में फोड़ा हो जाए, तो उससे मवाद निकलने का इंतजार करने से बेहतर है कि आपरेशन कर दिया जाए।